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शहडोल में सिस्टम फेल: जब पार्षदों ने कमिश्नर को दिया अल्टीमेटम फाइलों में त्रुटि निकालकर विकास रोकने का बड़ा खेल!

#शहडोल में सिस्टम फेल:जब पार्षदों ने #कमिश्नर को दिया अल्टीमेटम
फाइलों में त्रुटि निकालकर विकास रोकने का बड़ा खेल..!


#शहडोल बुलेटिन। मध्य प्रदेश के #शहडोल जिले में नगरीय निकाय और प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ चुकी है कि अब खुद जनता के चुने हुए #जनप्रतिनिधि पार्षद सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। संयुक्त पार्षद मंच ने #शहडोल #संभाग के संभागायुक्त कमिश्नर सुरभि गुप्ता को एक तीखा और चेतावनी भरा मांग पत्र सौंपा है। पार्षदों का आरोप है कि पिछले 2 वर्षों से जानबूझकर शहडोल #नगरपालिका परिषद के अंतर्गत आने वाले सभी वार्डों की फाइलों को तकनीकी और विभागीय स्वीकृति के नाम पर अटकाया जा रहा है और बार बार बेतुकी त्रुटियां बताकर फाइलें वापस फेंक दी जाती हैं।
जनता के बीच रहने वाले पार्षदों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शहडोल की जनता को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं और फाइलों का खेल बंद नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र #आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की होगी।
दरअसल पार्षदों ने अपने शिकायती पत्र में उन 4 बड़े मुद्दों को उठाया है जो #शहडोल के नगरीय विकास की खोखली हो चुकी व्यवस्था को उजागर करते हैं।
* हर फाइलों में कमियां 39 वार्डों की उपेक्षा: पिछले 2 साल से जब भी पार्षद अपने-अपने वार्डों में रोड, नाली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग लेकर प्रस्ताव तैयार करते हैं तो नगरीय प्रशासन एवं विकास कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी फाइलों में खामियां निकालकर उन्हें बार-बार लौटा देते हैं। इस 'फाइल-फाइल' के खेल में नगर के सभी 39 वार्डों का विकास पूरी तरह ठप हो चुका है।
* #बुढार चौक से न्यू बस स्टैंड रोड केवल आश्वासन, कार्रवाई शून्य: बुढार चौक से लेकर न्यू बस स्टैंड की मुख्य सड़क का विकास कार्य अधर में लटका हुआ है। आज दिनांक तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे आए दिन जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और नागरिकों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
* म्यूजिकल चेयर बना #CMO का पद, स्टाफ की भारी कमी: शहडोल #नगरपालिका का हाल यह है कि पिछले महज 1 वर्ष के भीतर 3 बार मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) बदले जा चुके हैं। यही नहीं, संभाग कार्यालय में कार्यपालन यंत्री (EE) के 2 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 1 ही अधिकारी के भरोसे पूरा काम चल रहा है, जिससे फाइलों का अंबार लगा हुआ है और जनता के काम लटके पड़े हैं।
* 2 साल से सीवर प्रोजेक्ट का नरक झेल रही जनता: नगरपालिका परिषद शहडोल में करोड़ों का सीवर प्रोजेक्ट स्वीकृत तो है, लेकिन पिछले 2 वर्षों से नगर के समस्त वार्डों की सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है। घटिया प्लानिंग और सुस्त रफ्तार के कारण पूरा शहर धूल और गड्ढों के नरक में तब्दील हो चुका है, जिससे आम जनमानस त्रस्त है।
पार्षदों का तीखा सवाल- "क्या हम सिर्फ चुनाव जीतने के लिए हैं..?"
संयुक्त पार्षद मंच के पदाधिकारियों (जिनमें वार्ड 10, वार्ड 08, वार्ड 35, वार्ड 11 के पार्षदों सहित अन्य के हस्ताक्षर शामिल हैं) का कहना है कि जब जनता हमसे पानी, सड़क और बिजली मांगती है, तो हमारे पास कोई जवाब नहीं होता। अधिकारी अपनी वातानुकूलित केबिनों में बैठकर जनता की फाइलों को कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं।
#कलेक्टर और #कमिश्नर की साख दांव पर..!
पार्षदों के इस सीधे मोर्चे के बाद अब देखना यह होगा कि शहडोल #कमिश्नर सुरभि गुप्ता और जिले के कलेक्टर इस गंभीर मामले में क्या एक्शन लेते हैं। क्या फाइलों में अड़ंगा लगाने वाले बाबू और इंजीनियरों पर गाज गिरेगी या फिर शहडोल की जनता यूं ही नरकीय जीवन जीने को मजबूर रहेगी..?

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