अनूपपुर:- में शिक्षकों का बड़ा आंदोलन टीईटी अनिवार्यता के विरोध में रैली उपवास और 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन!
अनूपपुर:- जिले में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिलेभर के शिक्षकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। अध्यापकों ने टीईटी शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने तथा अपनी 5 सूत्रीय मांगों के समर्थन में सामूहिक उपवास धरना प्रदर्शन और विशाल पैदल रैली का आयोजन किया।
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घटनाक्रम और आंदोलन की रूपरेखा
आयोजक: अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा अनूपपुर।
प्रदर्शन का स्वरूप: एक दिवसीय उपवास सामूहिक धरना और पैदल मार्च।
रैली का मार्ग: सामतपुर स्थित शिव मारुति मंदिर तालाब परिसर से प्रारंभ होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय तक।
ज्ञापन की प्रस्तुति: कलेक्ट्रेट पहुँचकर शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा।
सामतपुर तालाब से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च
जिले के विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में पहुँचे शिक्षकों ने सामतपुर स्थित शिव मारुति मंदिर तालाब के पास एकत्र होकर पहले धरना दिया और उपवास रखा। इसके बाद शिक्षकों का जत्था पैदल रैली के रूप में नारेबाज़ी करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय की ओर बढ़ा। रैली के दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज़ उठाई और शासन से अध्यापकों के हित में त्वरित निर्णय लेने की अपील की।
शिक्षकों की मुख्य 5 सूत्रीय मांगें
टीईटी (TET) अनिवार्यता से मुक्ति: कई वर्षों से निरंतर सेवा दे रहे कार्यरत अध्यापकों व शिक्षकों पर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता: संविलियन के बाद वरिष्ठता की गणना शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए और उसी आधार पर क्रमोन्नति एवं पदोन्नति दी जाए।
पुरानी पेंशन व वित्तीय लाभ: शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) का पूर्ण लाभ बहाल किया जाए तथा वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।
अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में शिथिलता: दिवगंत शिक्षकों के आश्रितों को बिना किसी कठिन शर्त या परीक्षा के तत्काल अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
प्रशासनिक एवं सेवा शर्तों में सुधार: अध्यापक संवर्ग से जुड़ी विभागीय व प्रशासनिक समस्याओं का पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए।
शिक्षकों की चेतावनी और आगे का रुख
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक वर्षों से पूरी निष्ठा और ईमानदारी से शिक्षा विभाग में सेवाएँ दे रहे हैं। ऐसे में उन पर नई परीक्षा शर्तें थोपना और वरिष्ठता का लाभ न देना न्यायसंगत नहीं है। यदि शासन द्वारा इन 5 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो यह आंदोलन जिला स्तर से बढ़कर राज्य स्तर पर और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

