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अनूपपुर:- कलेक्ट्रेट में गूंजी असहायों की आवाज जनसुनवाई में पहुंचे दो बड़े मामले!

अनूपपुर:- कलेक्ट्रेट में गूंजी असहायों की आवाज जनसुनवाई में पहुंचे दो बड़े मामले!

अनूपपुर:- कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की संवेदनहीनता की पोल खोलती तस्वीरें सामने आईं। सालों से चक्कर काट रहे पीड़ितों को जब कोई राहत नहीं मिली तो वे अपनी व्यथा लेकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचे।

@shahdolbulletin 9425111809

30 सालों से हक से वंचित दिव्यांग बैगा महिला:

  • 3 दशक का लंबा इंतजार: विशेष संरक्षित बैगा जनजाति से आने वाली एक दिव्यांग महिला बीते 30 वर्षों से मूलभूत सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है।

  • परिजनों के साथ पहुंची कलेक्ट्रेट: थक-हारकर महिला अपने पूरे परिवार के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची और अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती सुनाई।

  • सवालिया निशान: जहाँ सरकारें जनजातीय कल्याण और दिव्यांगों के लिए करोड़ों की योजनाओं का ढिंढोरा पीटती हैं, वहीं 30 साल से एक लाचार महिला का योजना-विहीन रहना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

आउटसोर्स कर्मचारियों का फूटा गुस्सा वेतन में देरी:

  • वेतन न मिलने से संकट: जनसुनवाई में दूसरा बड़ा मामला एक निजी कंपनी/संस्थान से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारियों का रहा।

  • सौंपा ज्ञापन: लंबे समय से वेतन रुकने और समय पर भुगतान न होने से परेशान आउटसोर्स कर्मचारियों ने लामबंद होकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और अपना बकाया वेतन जल्द से जल्द जारी करने की मांग की।

जनता का तीखा सवाल:

जब जनसुनवाई में आने के बाद भी पीड़ितों को दशकों तक भटकना पड़े, तो इन योजनाओं का फायदा किसे मिल रहा है क्या प्रशासन केवल कागजी दावों तक ही सीमित रहेगा या धरातल पर भी कोई मदद पहुंचेगी!