बाणसागर विस्थापितों का प्रदर्शन: 8 महीने से पुनर्वास का इंतजार और प्रशासन की अनदेखी!
टीम डेस्क:
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कटनी बुलेटिन! बाणसागर परियोजना के तहत जलमग्न क्षेत्र डूब क्षेत्र से विस्थापित हुए भूमिहीन और गरीब ग्रामीणों का पुनर्वास व अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन।
कटनी जिले की विजयराघवगढ़ तहसील के अंतर्गत बाणसागर परियोजना डूब क्षेत्र से प्रभावित सैकड़ों ग्रामीण गुरुवार को अपनी मांगों को लेकर कटनी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी जल जंगल और जमीन की सुरक्षा को लेकर उग्र नारेबाजी की तथा कलेक्टर के नाम संयुक्त कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया। पिछले 8 महीनों से पुनर्वास प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है जिसके कारण प्रभावित परिवार लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
विस्थापितों की प्रमुख शिकायतें और समस्याएं!
बेदखली और कानूनी कार्रवाई की धमकी: ग्रामीणों का आरोप है कि उचित पुनर्वास और मुआवजा दिए बिना ही उन्हें वर्तमान निवास स्थानों से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही उन पर केस दर्ज करने की धमकियां भी दी जा रही हैं।
आजीविका और आश्रय का संकट: विस्थापन के कारण कई परिवार पूरी तरह बेघर हो चुके हैं और भूमिहीन होने की वजह से उनकी रोज़ी-रोटी तथा आजीविका पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
पुनर्वास नीति का अनुपालन न होना: परियोजना के तहत मिलने वाली पुनर्वास सुविधाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं कागज़ों तक ही सीमित हैं जिससे ज़मीनी स्तर पर पीड़ित परिवारों को कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें!
तत्काल पुनर्वास व्यवस्था: सभी प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को स्थायी आवास और पुनर्वास स्थल आवंटित किए जाएं।
धमकियों और पुलिस मामलों पर रोक: ग्रामीणों पर दर्ज या प्रस्तावित केस वापस लिए जाएं और बेदखली की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।
उचित मुआवजा व आजीविका साधन: जल जंगल जमीन पर उनके अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा और आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएं।

