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रीवा:- मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध चिरहुला और लक्ष्मणबाग मंदिर से जुड़ी है जहाँ प्रशासन ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है !

रीवा:- मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध चिरहुला और लक्ष्मणबाग मंदिर से जुड़ी है जहाँ प्रशासन ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। रीवा के चिरहुला और लक्ष्मणबाग मंदिर में बदला नियम भंडारे में प्लास्टिक और थर्माकोल के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रीवा के प्रसिद्ध चिरहुला हनुमान मंदिर और लक्ष्मणबाग मंदिर परिसर। मंदिर परिसर और भंडारों में सिंगल-यूज प्लास्टिक (Single-Use Plastic) तथा थर्माकोल से बनी कटोरी, प्लेट, गिलास आदि के उपयोग पर रोक। भंडारे के आयोजन के बाद मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक का कचरा और गंदगी फैल रही थी। मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए यह सख्त फैसला लिया है। रीवा के चिरहुला और लक्ष्मणबाग मंदिर धार्मिक आस्था के बड़े केंद्र हैं,जहाँ प्रतिदिन और विशेष पर्वों पर हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यहाँ अक्सर बड़े पैमाने पर भंडारों (प्रसाद वितरण) का आयोजन किया जाता है। हाल के दिनों में देखा गया कि भंडारे के बाद डिस्पोजल थर्माकोल प्लेट, प्लास्टिक की गिलास और चम्मचों को खुले में फेंक दिया जाता था। इससे पूरे मंदिर परिसर की पवित्रता और सुंदरता प्रभावित हो रही थी। बढ़ती गंदगी और श्रद्धालुओं की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है भंडारा आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी प्रकार के प्लास्टिक या थर्माकोल के बर्तनों का उपयोग न करें। आयोजकों को पत्तल (दोना-पत्तल), कागज़ या धातु के बर्तनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। भंडारा समाप्त होने के तुरंत बाद आयोजकों को स्वच्छता सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी दी गई है। मंदिर परिसर को साफ-सुथरा और प्लास्टिक-मुक्त बनाना। थर्माकोल और प्लास्टिक के कचरे से होने वाले प्रदूषण को रोकना। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में स्वच्छता के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना जगाना।