महज 24 घंटे के अंतराल मे हुई मौत
CM ने लिया संज्ञान...प्रोटोकॉल बगैर आ धमके स्वास्थ्य मंत्री, 02 कार्यमुक्त
शर्मनाक: 06 आदिवासी नवजात शिशु ने दम तोड़ा..मामले मे कार्यवाही
सिटी डेस्क
9575511705
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शहडोल बुलेटिन। कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल शहडोल में 12 घंटे के भीतर 6 बच्चो की मौत का मामला सामने आने के बाद मीडिया की सुर्खियों में आते ही राजधानी से सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्वास्थ्य मंत्री मध्यप्रदेश शासन तुलसीराम सिलावट को ऑन स्पाट भेजकर एक्शन मोड पे आते हुए आदिवासी नवजात शिशुओं की मौत में जिम्मेदार अधिकारियों की छुट्टी कर कार्यमुक्त करने के आदेश देते हुए स्वास्थ्य मामले लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी चेताया।
क्या था पूरा मामला....
क्या था पूरा मामला....
चिकित्सालय में भर्ती छह बच्चों की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन कि लापरवाही सामनें आई है। मृत बच्चों में 2 बच्चों की मौत बच्चा वार्ड में वहीं 4 बच्चें एसएनसीयू में हो गई जहा वे भर्ती थे। बीती रात एक के बाद एक 6 बच्चो की मौत से जिला अस्पताल में हड़कंप मच गया। वही इस मामले को अस्पताल प्रबंधन लगातार लापरवाही छिपाने का प्रयास कर रहा था। वहीं मीडिया के सामने अधिकारी कुछ भी कहने से मना कर रहा है।
हो रही थी एक के बाद एक मौत
हो रही थी एक के बाद एक मौत
बीते 12 घंटे के अंदर शहड़ोल के जिला चिकित्सालय में छह बच्चों की मौत से हडकंप है। 03 बच्चे निमोनिया से पीड़ित थे और तीन बच्चे कुछ ही दिनों पहले अस्पताल में ईलाज के लिये भर्ती हुये थे। जिन बच्चों के मौत की खबर सामने आई है उसमें जैतपुर विकासखंड के ग्राम खरेला में रहने वाली चैत कुमारी की मौत 13 जनवरी को 10:50 पर हुई है चैत कुमारी को उसके पिता बालक कुमार ने यहां भर्ती कराया था वही एसएनसीयू में दूसरी बच्ची फूलमती सिंह पिता लाल सिंह निवासी जयसिंह नगर विकास खंड ग्राम भटगांव बताया गया है इसकी भी मौत 7:50 शाम को हुई। श्याम नारायण कोल पिता केतन रनमत कोल ग्राम अमिलिया की मौत भी 3:30 पर होना बताया गया है। वहीं चौथे बच्चे सूरज बैगा पिता संतलाल बैगा निवासी ग्राम निपनिया कि 6:00 बजे मौत होना बताया गया है। इसी तरह बच्चा वार्ड में भर्ती दो अन्य बच्चों की भी मौत होने की जानकारी मिली है। जिसमें अंजलि बैगा और सुभाष बैगा नामक बच्चे की मौत का कारण निमोनिया होना बताया गया है।
डॉक्टर भी काम नही...
डॉक्टर भी काम नही...
13 और 14 जनवरी की दरमियानी रात हुई इस घटना नें एक बार फिर शहड़ोल संभागीय मुख्यालय में स्थित कुशाभाऊ ठाकरे जिला चिकित्सालय प्रबंधन की लापरवाही सामनें ला दी है। गौरतलब हो कि कुछ ही दिनों पहले एक प्रसूता की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आम - जन एक एकजुट होकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। लेकिन सुधार होनें की बजाय लगातर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामनें आ रही है। हालांकि इस मामले में भी स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने जांच चल रही है जाते जाते मीडिया पूछे जाने पर बतलाया।
इस मामले हालांकि जिला अस्पताल प्रबंधन एवं ड्यूटी डॉक्टरों द्वारा की गई लापरवाही को राजनीतिक रंगढंग से बचाने किए गए प्रयास विफल रहें। मीडिया अपना दायित्व ईमानदारी से निभाया और काबिले तारीफ़ यह भी है कि सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मामले को हाथों हाथ लिया और कार्रवाई की।
बहरहाल जिसकी कोख से जना नवजात दुनिया से विदा हो गया जिस मां की गोद सूनी हो गई उसके दर्द को इतना मरहम काफी ना था।
समझे लापरवाही का गठजोड़ ...
इस मामले राजेश पाण्डेय मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी ने निमोनिया के शिकार हुए नवजात शिशुओं की मौत कहा था वहीं एक दिवसीय प्रवास के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल ने आदिवासी नवजात शिशुओं की मौत को हल्के फुल्के अंदाज मे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को क्लीन चिट दे डाली समझ से परे है।
इस मामले हालांकि जिला अस्पताल प्रबंधन एवं ड्यूटी डॉक्टरों द्वारा की गई लापरवाही को राजनीतिक रंगढंग से बचाने किए गए प्रयास विफल रहें। मीडिया अपना दायित्व ईमानदारी से निभाया और काबिले तारीफ़ यह भी है कि सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मामले को हाथों हाथ लिया और कार्रवाई की।
बहरहाल जिसकी कोख से जना नवजात दुनिया से विदा हो गया जिस मां की गोद सूनी हो गई उसके दर्द को इतना मरहम काफी ना था।
समझे लापरवाही का गठजोड़ ...
इस मामले राजेश पाण्डेय मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी ने निमोनिया के शिकार हुए नवजात शिशुओं की मौत कहा था वहीं एक दिवसीय प्रवास के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल ने आदिवासी नवजात शिशुओं की मौत को हल्के फुल्के अंदाज मे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को क्लीन चिट दे डाली समझ से परे है।




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