Header Ads Widget


 

Ticker

6/recent/ticker-posts

बड़ी खबर: अनूपपुर-शहडोल सहकारिता विभाग में बड़ा प्रशासनिक खेल..! 10 लाख के गबन का आरोपी 'रोहित सिंह' हुआ मेहरबानियों से मालामाल कैडर नियमों को ठेंगा दिखाकर सौंपा 'मलाईदार' पद..!


  • "गबन का इनाम: न निलंबन, न कार्रवाई, सीधे मलाईदार पद पर पदोन्नति!"
    "खा गए जो दस लाख का हिसाब, उन्हें ही सौंप दिया दफ्तर की चाबी का कमान!"

  • टीम डेस्क, 9425111809 

    अनूपपुर/शहडोल: सहकारिता विभाग में नियमों की धज्जियां उड़ाने और चहेतों को उपकृत करने का एक और गंभीर मामला सामने आया है! अनूपपुर जिले में पदस्थ कर्मचारी रोहित सिंह, जिन पर ₹10 लाख रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितताओं की विभागीय व पुलिस जाँच चल रही है, उन्हें निलंबित या किनारे करने के बजाय सहकारिता विभाग के महत्वपूर्ण कार्यालयीन पद की कमान सौंप दी गई है।


    क्या है पूरा घोटाला और नियमों की धज्जियां..?

    1️⃣ न रजिस्टर, न प्रस्ताव... सीधी एंट्री: सूत्रों के मुताबिक, इस पदस्थापना के लिए न तो कोई आधिकारिक बैठक बुलाई गई, न ही रजिस्टर में प्रस्तावक का नाम दर्ज है। बिना किसी सक्षम अनुशंसा के ही पिछले दरवाजे से यह नियुक्ति कर दी गई।

    2️⃣ कलेक्टर (OIC) को अंधेरे में रखने का खेल: विभाग के शीर्ष प्रभारी अधिकारी (OIC) स्वयं जिला कलेक्टर हैं, लेकिन उनके नीचे के कुछ अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।

    3️⃣ गोपनीय दस्तावेजों पर खतरे की घंटी: नियमतः फील्ड कर्मचारियों का काम ग्रामीण अंचलों में जाना होता है, न कि दफ्तरी काम संभालना। जिस दफ्तर में संस्था का पूरा आय-व्यय, वित्तीय रिकॉर्ड और गोपनीय दस्तावेज मौजूद हों, वहां 10 लाख के गबन के आरोपी को बैठाना साक्ष्यों से छेड़छाड़ (Evidence Tampering) की बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है!


    क्या कहता है कानून? (विभागीय व कानूनी धाराएं)

    • BNS धारा 316 (पुराणी IPC 409): लोक सेवक/कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात और गबन—यह गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

    • BNS धारा 336/338 (IPC 468/471): धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने पर 7 साल तक की जेल

    • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (धारा 7/13): पद के दुरुपयोग और अवैध वित्तीय लाभ पर 3 से 10 साल तक की कैद

    • सेवा नियम: जाँच लंबित रहने तक आरोपी को संवेदनशील या प्रशासनिक पदों से दूर रखना/निलंबित करना अनिवार्य होता है।


    भ्रष्टाचारियों में खुशी का माहौल..! सूत्रों का कहना है कि मलाईदार पदों पर दागियों की इस तरह नियुक्ति से सहकारिता के भ्रष्टाचारियों में जश्न का माहौल है। वहीं जागरूक नागरिक और विभाग के ईमानदार कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि—"क्या जिम्मेदार अफसर किसी और बड़े गबन का इंतजार कर रहे हैं...?"अब देखने वाली बात होगी कि जिला कलेक्टर (OIC) इस अवैध पदस्थापना पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं..!

    इनका कहना है"

    दिनांक 07 अगस्त 2026  के जारी आदेश मामले में पुनर्विचार एवं आदेश निरस्तीकरण के साथ पांच सूत्री मांग मुख्य कार्यपालन अधिकारी को हमने ज्ञापन के सौपा है, किसी भी सूरत में आर्थिक अपराध को बढ़ावा देना सही नहीं है l                                                    

                                                              निर्मल कुमार पाण्डेय

    अध्यक्ष, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कर्मचारी संघ, शहडोल 

    (मप्र कॉपरेटिव बैंक एम्प्लाइज फेडरेशन) 

    .......................................


    .......

    कलेक्टर शहडोल 


    अगर आपके पास भी है कोई खोजी खबर तो व्हाट्सअप कीजिये 9425111809 9575511705 07652358837