शर्मनाक: मुट्ठी भर मास्क से कर दी Reliance CBM की ब्रांडिंग
प्रोजेक्ट के जिम्मेदारों ने खूब निभाई मौकापरस्ती
- SHAMEFUL: शहरी और ग्रामीणों के प्रति बेपरवाह रवैया
सिटी डेस्क
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शहड़ोल बुलेटिन। कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप से भारत की मुश्किलें बढ़ती जा रही है, देश के पीएम से लेकर राज्यों के सीएम तक इस संकट से उबरनें के लिये हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और आम जन तक हर राहत पहुंचानें के प्रयास में लगे हुये हैं। 21 दिन के लॉकडाउन के बाद भारत में हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन इस कोरोना संक्रमण को रोकनें इसके बढ़ते चक्र को तोड़नें और इसे रोकनें का यह सबसे मजबूत तरीका है। पीएम मोदी के एक ऐलान के बाद समूचा हिन्दुस्तान एक होकर इस राष्ट्रव्रत में शामिल हो गया और कोरोना से लगातार जंग जारी है।
देश के मुखिया के 21 दिन के अचानक लॉकडाउन के ऐलान के बाद देश में वृहद स्तर पर ना सिर्फ पलायन हुआ बल्कि सरकार द्वारा लगातार सैकड़ों अपील की गई जो जहां है वहीं रहे सुरक्षित रहे उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति सरकार द्वारा की जायेगी ,लेकिन लोग नहीं मानें और लाखों लोगों का पलायन हुआ, समस्त सार्वजनिक आवागमन बंद होनें के बावजूद लाखों मजदूरों पैदल ही निकल पड़े, उनके स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर सरकार के लिये इन लोगों का डाटा कलेक्ट करना और इस आधार पर सरकार द्वारा आमजन तक राहत पहुंचाना अभी भी किसी चुनौती बना हुआ है।
इन परिस्थितियों में देश के मुखिया नें समूचे देश से यह अपील कर कहा कि इस आपदा कि घड़ी में प्रत्येक व्यक्ति मानवता धर्म का पालन करते हुये समाज में यथासंभव मदद करें। जिसके बाद समूचे देश में लोग सड़कों से लेकर बस्तियों में राहत अलग - अलग तरह से राहत पहुंचाने में जुट गये। और विश्वपटल पर भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां आमजन घर - घर तक पहुंचकर इन कार्यों में लगा हुआ है।
कुछ इसी दिशा में भारत के कई बड़े - छोटे उद्योगपति , कलाकार , खिलाड़ी आम समाज के लोग समानें आये और इस संकट की घड़ी में सरकार को राहत राशि पहुंचाने के साथ ही राशन और भोजन की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं। कुछ इसी दिशा में देश की अग्रणी कंपनी रिलायंस भी समानें आई, जिससे बड़े मदद की की अपेक्षायें देश के साथ ही शहड़ोल जिलेवासियों को भी थी, लेकिन महज 800 नग मास्क बांटकर खानापूर्ति कर ली , रिलायंस के स्थानीय कर्ताधर्ताओं की इस राहत के बाद जनप्रतिनिधियों को भी बोलनें पर मजबूर कर दिया और इनके शहड़ोल जिले में स्थापित अरबों रुपये के CBM प्रोजेक्ट की स्थापना और स्थानीय स्तर पर आमजन की अपेक्षाओं को गहरा आघात पहुंचाया है, खास तो यह है कि विश्वस्तर पर अपनी अमिट पहचान बनाये हुये इस कंपनी के स्थानीय प्रबंधन द्वारा देश की इस विपदा की घड़ी में किया गया कार्य जनसंवेदनाओं और उनसे कितना सरोकार है इसको भी सामनें ला दिया है।
शहड़ोल जिले में कोरोड़ो रुपये की लागत से जब रिलायंस द्वारा जब प्रोजेक्ट की स्थापना की जा रही थी तो पूरे जिले की उम्मीद स्थानीय रोजगार,व्यापार और विभिन्न रुप से यहां के विकास को लेकर की जा रही थी, लेकिन वह नहीं हुआ, वहीं इस संकट की घड़ी में आदिवासी बाहुल्य जिले शहड़ोल में बड़ी आबादी है जिसे मास्क,सेनेटाईजर,राशन के साथ की आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति के लिये केन्द्र व राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है, साथ ही जिले के सैकड़ो समाजसेवी लगातार बिना किसी ब्रांडिंग के आम जन को राहत पहुंचानें में लगे हुये हैं, लेकिन जिले के कई बडे अधिकारियों के साथ लाखों की आबादी वाले इस शहड़ोल जिलें में स्थापित सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस के कर्ताधर्ता मजह 800 नग मॉस्क बांटकर ठगा है, इनके स्थानीय प्रबंधन के सेवाकार्य की तब और भी असंवेदनशील लगनें लगती है जब कंपनी नें इस कार्य में जिले के अधिकारियों को शामिल कर लिया और उनकी मौजूदगी में घटिया क्वालिटी के मास्क बांटकर बकायदे इस कार्य की ब्रांडिंग की।
जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा इस संक्रमण के फैलाव की रोकथाम को लेकर जिले में रिलायंस द्वारा बड़े राहत कार्य की मांग की जा रही थी , और यह उम्मीद थी कि जिले की गौरव बनीं यह कंपनी इस संक्रमण के फैलाव व बचाव के लिये स्थानीय प्रशासन और आमजन के लिये बड़े राहत इंतजाम करेगी लेकिन दुर्भाग्य 800 मॉस्क से ही जिलेवासियों को संतुष्ट होना पड़ा।
जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा इस संक्रमण के फैलाव की रोकथाम को लेकर जिले में रिलायंस द्वारा बड़े राहत कार्य की मांग की जा रही थी , और यह उम्मीद थी कि जिले की गौरव बनीं यह कंपनी इस संक्रमण के फैलाव व बचाव के लिये स्थानीय प्रशासन और आमजन के लिये बड़े राहत इंतजाम करेगी लेकिन दुर्भाग्य 800 मॉस्क से ही जिलेवासियों को संतुष्ट होना पड़ा।


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