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बुधवार, 5 सितंबर 2018

बड़ौदाबैक कर्मचारी कर रहा SECL मे नौकरी

प्रबंधन से धोखाघडी कर अर्जित किया जा रहा दोहरा वेतन
शहडोल। संभाग अंतर्गत कोयला खदान की दशकों से संचालित कोयला खदान एस.ई.सी.एल सोहागपुर क्षेत्र भारत सरकार की सहयोगी कंपनी के शीर्ष स्थान पर सुशोभित है जहाँ साउथ ईस्टर्न कोल्ड फिल्ड लिमिटेड कंपनी मिनी रत्न से महारत्न मे सुमार कंपनी कालरी श्रमिकों के लिए भी बेहतर सुख सुविधाओं मे कोई कोर कसर नहीं छोडता। यहां कर्मचारियों को वेतन, आवास, स्कूल, बिजली, चिकित्सालय आदि से कालरी कर्मचारियों सहित परिवार की सुविधाएं उपलब्ध कराया जाता है। स्वाभाविक है ईमानदारी से काम करने का प्रतिफल ही है जो प्रबंधन कालरी कर्मचारियों की सारी सुविधाओं के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च करने से पीछे नहीं हटता। वहीं कुछ कालरी कर्मचारियों की फेहरिस्त में फर्जी तरीके से नकली दस्तावेजों के आधार पर हथियायी नौकरी करने वाले लोग शामिल हैं। जो सारी सुविधाएं बडी बेशर्मी से उठा रहे हैं और आश्चर्य इस बात का है कि इस फर्जीवाड़े की जानकारी अधीनस्थ कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों को भी है संभवतः इस फर्जीवाड़े पर अंडरटेबिल मैनेजमेंट ही है जो जिम्मेदार अधिकारियों ने फर्जीवाड़े की प्रमाणिकता का सत्यापन करना अब तक जरूरी नहीं समझा। यह हैं मामले मे झोलझाल... कोयलांचल मे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने की घटनाएं सामने अक्सर आया करती हैं परंतु साऊथ इस्टर्न कोल्ड फील्ड लिमिटेड का सोहागपुर एरिया इन दिनों फर्जीवाड़े की अनसुनी कहानी की प्रमाणित दस्तावेज के अवलोकन के बाद सामने आ ही गई। कालरी कर्मचारी रामलखन दोहरा लाभ ले रहा है इस नाम राम-लखन की नौकरी ट्यूस्ट है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब मामले मे रामदयाल बडा भाई अपने अनुज रामलखन के नाम पर फर्जी तरीके से नौकरी तो हथिया ही लिया। इसी दरमियान परंतु छोटे भाई को भी नौकरी का अवसर मिल जाता हैं। यह सब बात सार्वजनिक ना हो तो दोनों ने समाज और संबंधित विभाग के सामने दोनों ने पूरब पश्चिम की कहानियां गढ़ी और बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत भी किया। लेकिन सच्चाई लाख पर्दे के पीछे हो सामने आ जाती हैं जो बैक और कालरी मे एक ही व्यक्ति पदस्थापना आखिर कैसे हो सकती हैं दस्तावेजों की पकड़ में प्रमाणित हो गई। नकली दस्तावेज भी किए तैयार... कोयलांचल का पहला मामला सामने आया है जहा दौहरे लाभ के लिए फर्जीवाड़े की हद लोगों ने पार कर दी। नौकरी के तमाम दस्तावेजों एवं सेजरा के मुताबिक कालरी और बैक मे कार्यरत कर्मचारियों के पिता के तीन पुत्र ही है जिनका ग्राम देवई मझौली (सीधी) के पैतृक निवासी हैं। जिनके सेवा अभिलेख चीख चीखकर इनके फर्जीवाड़े को बता रहे हैं। हालांकि इस मामले पर छोटे भाई के तमाम दस्तावेज सही है लेकिन एक पदस्थापना हो जाने के बाद उसी नाम पर आखिर कोई कैसे पदस्थ हो सकता है यद्यपि यह फर्जीवाड़े मे शामिल नहीं हो तो दोषी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज अब तक कराया क्यूं नहीं गया। एक चपरासी दूसरा अटेडर.... छोटा भाई चपरासी के पद पर मूल दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहा है लेकिन बडा भाई फिर कैसे यही दस्तावेज के आधार पर छोटे भाई के नाम पर कालरी कर्मचारी बनकर तमाम सुख सुविधाओं का उपभोग कर रहा है। यानी बैक प्रबंधन के साथ साथ कालरी प्रबंधन से दोहरा लाभ लेने की मंशा से सुनियोजित धोखाघडी की गई। अधिकारियों की साठगांठ.... इस मामले पर जानकारी यह भी है कि कालरी प्रबंधन के कुछ चाटुकार नेताओं अधिकारियों को उपकृत करा कर अपने पिता का नाम ही बदला गया है लेकिन इस दौरान सेवा अभिलेख समस्त्र दस्तावेजों में काटछांट की गई जोकि धोखाघडी कारित किए जाने का पुख्ता प्रमाण है। जहां बडे भाई ने पेयमेंट शील्प मे पिता का नाम बदलकर रामकुमार कर लिया वहीं छोटे भाई ने भी अपने दस्तावेजों का बेजा इस्तेमाल पर चुप्पी साधे हुए हैं। जनचर्चाए यह भी है कुछ एक चाटुकार छुटभैय्ये कोयलांचल मे श्रमिक संगठनों का हवाला देकर गौतम बाबू इस रामलखन की जोडी को बतौर आर्थिक लाभ लेकर चिंता हर लिए हैं। उक्त मामले संबंधित विभाग के आला अधिकारियों को दोनों व्यक्तियों के आधार कार्ड से जांच कर पैतृक संपत्ति का विवरण लेकर की गई सुनियोजित धोखाधड़ी पर मुकदमा दर्ज करा अब तक की धोखाधडी कर आहरित उपभोग की गई राशि की वसूली का प्रकरण पंजीबद्ध करना चाहिए। .......... कालरी प्रबंधन प्रतिक्रिया..... आश्चर्य है.....मामले की शिकायत की कापी भेजिए। मै तत्काल जांच कार्यवाही करता हूं। विश्वजीत चौधरी महाप्रबंधक, एस.ई.सी.एल. सोहागपुर क्षेत्र, धनपुरी शहडोल .... मामले पर आगे और भी कई खुलासा होना बाकी है कालरी का कौन अधिकारी दे रहा शह, फर्जीवाडा को जानकर भी अनजान बैक प्रबंधन की बयानबाजी अभी बाकी है। पढे़ लगातार।

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