तो.....मैडम पुरस्कार की होड़ में कुछ भी, झूठी कहानी से तो गुमराह हो रहा निर्वाचन आयोग
इलेक्शन एनालिसिस
शहडोल बुलेटिन। इलेक्शन के दरमियान कलेक्ट्रेट में पीड़ित का कोई माई बाप नहीं सब मध्यप्रदेश शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन के सारे अपवाद को ऐसे ही छोड़कर चुनावी बयार में भाजपा की सहायता ही कर रहे हैं हम बात कर रहे हैं शहडोल कलेक्ट्रेट में तमाम अधिकारियों की जिन्हें अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए मतदाता जागरूकता अभियान का ब्रंम्हात्र पकड़ाया गया है। इससे जहां मतदाता जागरूकता के तहत लाखों खर्च किए जा रहे वहीं दूसरी ओर इस खर्च करने के बाद मतदाता प्रतिशत कितना बढ़ सकता है यह अभी तय नहीं है।
जानकारी के मुताबिक सरकारी मशीनरी सहित तमाम अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ज्यादा से ज्यादा इवेंट्स किए जाएं।
बहरहाल इस विधानसभा चुनाव में मैडम का पहला चुनाव होने की वजह से भी एहतियातन मतदाता जागरूकता अभियान में तेजी लाने की कोशिश की गई है। इस आपाधापी में शासन के जनसंपर्क विभाग का बेजा इस्तेमाल कर बिगत माह में एक दिन में 2 लाख 50 हजार से ज्यादा लोगों को मतदाता जागरूकता अभियान के तहत एक साथ शपथ दिलवाई गई है का मिथिक समाचार भेजा कर चुनिंदा चहेते अखबारों में प्रकाशित भी करवाया गया। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि मैडम ने पत्रकारों की बिरादरी से कुछ एक को अपने निजी स्वार्थ के लिए लाभान्वित कर मीडिया का इस्तेमाल छपास कलेक्टर के रूप में कर रही है। जो की स्थानीय मीडिया में इन दिनों चर्चा का विषय है।
इस चुनाव में इतिहासिक कार्य किया है उन्होंने सबसे पहले आते ही कलेक्ट्रेट को छावनी बना दिया, पत्रकारों को समस्याओं पर बाइट्स आदि के लिए मिलने पर प्रतिबंध लगा दिया। इस बात की पुष्टि कलेक्ट्रेट में निजी सचिव श्रीवास्तव जी ने की है कि मैडम को पत्रकारों से नहीं मिलना चाहती। दिन बीता नहीं और अंतर ऐसा कि जो पहले ग्रामीण अंचलों से शिकायतों को लेकर आते थे उन्हें जूस पिलाकर समस्याओं का समाधान करने की तैयारी थी अब बदलाव इतना की ग्रामीण जूस पीने का ख्वाब देखें कलेक्ट्रेट भवन के अंदर हवा भी मिल जाए तो भाग्य है। मैडम का द्वयंम व्यवहार समझ से परे है बहरहाल जिले के अवैध खनन एवं ब्यौहारी हूं माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी क्यों हो रही है मीडिया जवाब चाहता है शायद कार्रवाई रसूख के आगे घुटने टेक दी और जवाब भी ना हो तो विधानसभा चुनाव को बैशाखी बनाना लाजिमी है।
इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है जब चौथे स्तंभ के सिपाहियों को नजरंदाज कर रही तो जिले की जनता तो समस्याओं के समाधान की उम्मीद ना लगाएं। मैडम को इस समय चंद मीडिया घरानों को तवज्जो देने और फुटेज लेना है इस दृष्टिकोण से एक दिन में एक साथ ढाई लाख लोगों को मतदान करने की शपथ दिलाई जा रही है। झूठी खबर की प्रमाणिकता पर संशय है कि संभव ही नहीं कि जिस गांव में जाकर मतदाताओं को जागरूक करने के लिए मतदान करने की शपथ दिलाई गई उस गांव की आबादी कितनी होगी।
जुमलेबाज़ राजनेता तो हमने कई देखें पर कलेक्ट्रेट के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी इस समाचार ने बताया कि कलेक्टर को फुटेज सच्चा, झूठा से कोई गुरेज नहीं।
बने रहिए शहडोल बुलेटिन पर। यह
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आगे पढें किस गांव में दिलाईं ढाई लाख मतदाताओं को मतदान करने की शपथ.....
झूठी कहानी का सच्चा विश्लेषण पार्ट 02



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