पॉलिटिकल डेस्क
शहडोल बुलेटिन। टिकट बंटवारे को लेकर अब हर दिन एक नया बखेड़ा खड़ा कर भाजपा लगातार अपने खुद के घर में घिरती नजर आ रही है कहीं रिंकू गुुट की गुटबाजी तो कहीं सुदामा समर्थकों का हंगामा से भाजपा में अंतर्द्वंद्व की स्थिति पैदा हो गई है शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने नरेंद्र मरावी को प्रत्याशी के रूप उतार है आपको बता दें कि प्रत्याशी के प्रेम विवाह करने के बाद भाजपा कांग्रेस में से किसी एक पार्टी का वजूद मिटना तय माना जा रहा था क्यूंकि स्व. दलबीर सिंह केबिनेट मंत्री सहित कई अहम पदों पर कांग्रेस सरकार में रहते हुए समूचे इलाके में कांग्रेस मजबूत जनाधार बनाने के कार्य किया था इस दृष्टिकोण से अनेकानेक कार्य शहडोलियो के हितों को ध्यान में रखते हुए किया। जिसमें इलाके में रोजगार, पर्यटन, सड़क, बिजली, पानी इत्यादि के लिए तत्कालीन केबिनेट मंत्री रहते हुए समूचे इलाके के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मजबूती से मांग करते रहे। और इलाके में यूनिवर्सिटी, ओरियंटल पेपर मिल जैसे बड़े उपक्रम इस परिवार की ही देन है।
परिवार के रग-रग में कांग्रेसी ख़ून
इनकी मृत्यु के बाद दलबीर सिंह की पत्नी राजेश नंदनी कांग्रेस की परंपरा को कायम रखते हुए दो चुनाव में भाजपा को पटखनी देने में अहम भूमिका निभाई है जो कि इनकी मृत्यु के पश्चात हुए उपचुनाव मे इनकी पुत्री हिमांद्री सिंह ने कांग्रेस पार्टी में परांपरा को बढ़ाते हुए शहडोल लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में सामने आई जिसके परिणाम ज़रूर भाजपा के पक्ष में रहे हैं लेकिन यह चुनाव मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी उपचुनाव में पसीने छूटने लगे थे कांग्रेस पार्टी के दिग्गजों की सियासत में परांपरा को बढ़ाते हुए हिमांद्री दलबीर सिंह ने पूरी शिद्दत से अपने दम पर चुनाव लड़कर दिखाया इस चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेताओं-कार्यकर्ताओं की भीड़ के आगे अकेले ही लडती रही हिमांद्री दलबीर सिंह का हौसला बढ़ाने वाले चंद लोगों के साथ घर घर जाकर कांग्रेस पार्टी की मृत आत्मा में जान डालने की कोशिश की थी लोग अपने घरों से निकलकर दलबीर, नंदनी की बिटिया को आशीर्वाद देने हर काम छोड़कर घरों से बाहर निकल आया करते थे। ऐसे भी खबर यह भी आई भाजपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले छत्तीसगढ़ के नेता जो हिमांद्री दलबीर सिंह के परिजनों के करीबियों में आते थे कहा कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भाजपा का दामन थाम ले। जिसके एवज में लोकसभा टिकट एवं करोड़ों रुपए का ऑफर मिला है समय की मांग और वक्त का तकाजा के हवाले के बावजूद दलबीर, नंदनी की बिटिया के हौसले डिगें (कस से मस) नहीं हुए। इस चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी से बाहर निकलने के प्रलोभन को ठुकराते हुए राजधर्म का पालन करते हुए दलबीर, नंदनी सिंह की बेटी ने चुनावी अखाड़े में दो दो हाथ किया। इस चुनाव में भाजपा की कूटनीति के आगे अकेले पड़ी हिमांद्री लगभग 50 हजार वोट से हार गई। परंतु शहडोल संभाग में मरी पड़ी कांग्रेस पार्टी में जान डाल दी। हार कर भी जीतना शायद इसी को कहते है।
चुनावी मिली हार पर दिल जीता
दिन बीता और अचानक खबर ये आई की भाजपा सरकार में आजाक आयोग अध्यक्ष नरेंद्र सिंह मरावी दलबीर, नंदनी की बिटिया हिमांद्री से विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं। यह विवाहिक बंधन उसी से बंधने जा रहा था जिसे पिछले लोकसभा चुनाव में हिमांद्री दलबीर सिंह की मां राजेश नंदनी सिंह ने चुनावी अखाड़े में हराया था कांग्रेस पार्टी की इस इलाके में एकबार फिर जीत हासिल की वहीं दूसरी ओर इस राजनीति के विपरित बिटिया हिमांद्री दलबीर सिंह का दिल जीतने का सपना नरेंद्र मरावी का मानो पूरा हो गया।
वर्तमान राजनीति होगी शून्य
हालांकि चुनाव के बाद कैसे हुआ समझाना थोड़ा मुश्किल है नामुमकिन नहीं फिर भी विवाहिक जीवन का राजनीति में परिवर्तन लाने की बात देखी गई है जो कि अपने-अपने सुविधाओं को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत फैसला है परंतु यहां कांग्रेस भाजपा का अस्तित्व कैसे गोते लगा रहा है और दूसरी ओर इलाके की राजनीति शून्य होने के कगार पर है कहना ग़लत नहीं होगा। जनचर्चाओ के बात करें तो इस पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत लोगों में हिमांद्री दलबीर सिंह को इस विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से चुनाव जीताकर भेजना चाहते थे परन्तु इस विधानसभा सीट से फुंदेलाल परस्ते को कांग्रेस ने दोबारा टिकट देकर चुनावी अखाड़े में उतार दिया। इससे नाराज हिमांद्री ने बचकाना फैसला ले लिया। जबकि कांग्रेस पार्टी की इस विधानसभा चुनाव में सीटिंग एमएलए को हटाने के पक्ष में बिल्कुल जोखिम उठाना नहीं चाहती थी।
कर्तव्य पालन से बच रही
अब नाराज़ हिमांद्री दलबीर सिंह ने राजधर्म से बेहतर पति धर्म निभाना बेहतर समझा। हालांकि इस चुनाव के बाद दलबीर सिंह, नंदनी सिंह की रखी कांग्रेस पार्टी की नींव पर भाजपा पूरी तरह से सेंधमारी पर आमादा है भाजपा प्रत्याशी के रूप में पति नरेंद्र सिंह मरावी को व्यक्तिगत रूप से उन्होंने ही स्वीकार किया विवाह के बंधन में बंधे हुए परंतु जनता जनार्दन को पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र की जनता को यह एहसास कराना टेढ़ी खीर है जो विधानसभा क्षेत्र दलबीर, नंदनी सिंह का कांग्रेस पार्टी का गढ़ माना जाता था आज इस गढ़ में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह मरावी की पत्नी कांग्रेस पार्टी की ईमानदार राजेशनंदनी की पुत्री हिमांद्री विजय तिलक लगाकर कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी फुंदेलाल परस्ते को हाराने का मां नर्मदे का आशीर्वाद चाहती है। जनता भाजपा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भगवान है मध्यप्रदेश उनका मंदिर और वो पूजारी यह अक्सर हम शिवराज सिंह से सुनते हैं। यह लाइन हिमांद्री को भी दोहराने की जरूरत है।
सीमित पृष्ठभूमि के पति
इनके पति भाजपा प्रत्याशी के बारे में इतना ही बता सकते हैं कि भाजपा संगठन के अजाक आयोग अध्यक्ष नरेंद्र मरावी को भाजपा ने अपने चुनावी एजेंडे के तहत दिया है ताकि एक साथ एक फ्री मिल जाए। भले ही परिवारिक जीवन में सियासत में परांपरा को भूलकर पतिधर्म निभा रही हैं लेकिन यह बात समझ से परे है कि भाजपा कांग्रेस में शामिल रहकर दोनों दंपति जनता के सामने किस हैसियत से खड़े होकर मतदान करने की गुजारिश करते हैं यह दिलचस्प होगा।
बगावत पर उतारू स्थानीय नेता
वहीं भाजपा के कद्दावर नेताओं ने ताल ठोकी है निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जिनका आरोप है कि भाजपा ने नरेंद्र मरावी को टिकट देकर बाहरी लोगों पर विश्वास जताया है स्थानीय लोगों की रात दिन की मेहनत बेकर है यहां शनिवार शिवराज सिंह मुर्दाबाद की जमकर नारेबाजी भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुदामा सिंह की मौजूदगी में हुई नामंकन के रैली के दौरान नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा किस प्रकार पुष्पराजगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बिना जीत दर्ज कर सकती है।
नोट आप सभी से आग्रह है कृपया इस कवरेज को अब्बू खां की बकरी से जोड़कर ना देखा जाएं।
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बने रहिए शहडोल बुलेटिन पर।।।
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आगे पढ़े अबूझ पहेली नहीं राजनैतिक प्रेम कहानी
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