मध्यप्रदेश के इस लोकसभा सीट मे बदले हार -जीत के पैमाने
दांव पर हिमांद्री की विरासत में मिली राजनीति
कांग्रेस मे प्रमिला को 04 विधानसभा मे खासी चुनौती
शहडोल बुलेटिन, लोकसभा चुनाव को लेकर तमाम राजनीति से जुड़े दिग्गजो के अपने अनुभव के चश्मे पर हार जीत के पैमाने ढूँढते हैं और इधर भाजपा कांग्रेस पार्टी दोनो का प्रत्याशी हारा हुआ है उसमें अब तो संगठन की सक्रिय भूमिका ही सही मायने में विजय पताका फहराने का कार्य मे दिन रात जुटी हैं यहा राजनीति के इतिहास में एक अध्याय ऐसा जोडा जाने वाला है जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने सांसद दलपद सिंह परस्ते के दिवंगत होने के पश्चात हुए उपचुनाव मे दलपद सिंह परस्ते का समर्पण की अनदेखी कर दी, स्व.दलपद सिंह परस्ते के लिए भारतीय जनता पार्टी का दायित्व यहा शून्य हो जाता है और पार्टी के सूत्रों के हवाले से खबर यह आने लगी की पुष्पराजगढ का अभेद किला कांग्रेस से कैबिनेट मंत्री स्व. दलबीर सिंह और राजेश नंदनी की पुत्री हिमांद्री को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बावजूद भाजपा ने शामिल किए जाने के तमाम उपाय साम, दाम, दंड, भेद इस्तेमाल किया परंतु कहते हैं संस्कार बडी जिम्मेदारी से दुधमुंहे बच्चे को दिया जाता है यही वयस्क होने पर काम आता है ताकि दुनिया में कोई लाख प्रलोभित करे जनता के साथ होता अन्याय के आगे नतमस्तक नही होता यही हुआ भी हिमांद्री सिंह ने भारतीय जनता पार्टी का प्रलोभन ठुकराना बेहतर समझते हुए कांग्रेस प्रत्याशी बतौर नामांकन दाखिल किया और पूरी शिद्दत के साथ धरातल पर उपचुनाव मे कांग्रेस की अपनी मूर्खता, कांग्रेसियो मे आपसी अंतर्कलह के बावजूद एक कहानी की पात्र अब्बू खॉ की बकरी वाली को चरितार्थ कर दिया, हालाकि वास्तविक संवेदनशीलता के नाम और परिवार का राजनीति के अलावा हर आम और ख़ास के लिए (हिमांद्री सिंह के माता-पिता) सुलभ और सरल व्यक्तित्व के धनी थे तब कही जाकर परिजनो की विरासत में मिली, कांग्रेस से लडकर हार गई थी हिमांद्री परंतु राजनीति में वापस आने की चर्चाओ का बाजार गर्म था और फिर खबर आई सगाई भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर हिमांद्री की मां स्व. राजेश नंदनी से हार मजा चखने वाले नरेंद्र मरावी से होने जा रही हैं जनता जिस परिवार को लेकर भारतीय जनता पार्टी के विरोध में मजबूत दावेदार के रूप में देखना चाहती थी वो सब मानो समाप्त हो गया परंतु राजनीति में संभावनाओ की कोई कमी नही, जनता नरेंद्र को कांग्रेस में शामिल हों ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था जिसे लेकर प्रकाशित एक समाचार के बाद नरेंद्र मरावी ने कांग्रेस मे शामिल होने का खंडन किया इस तरह से भारतीय जनता पार्टी के दायित्व का निर्वाह नरेंद्र ने बखूबी किया और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान हिमांद्री भारतीय जनता पार्टी मे शामिल होकर अब भीतरघात, विरोधियों की संख्या में इजाफा कर लिया इसका असर ज्ञान सिंह की बगावत के रूप में दिखाई दे रहा है वहीं बीते उपचुनाव मे गाया मंच पर एक गाने से हिमांद्री ने तमाम शिकायत की. वो गीत यह... दिल को देखो चेहरा ना देखो दिल सच्चा चेहरा झूठा...... था




