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माफियाराज :02 निजी बडे स्कूल, हजारों बच्चों की जान का जोखिम
बेलगाम अवैध कोयला खनन, कार्यवाही की मांग
झगरहा ग्राम की बंद खदानो से ताबड़तोड़ खनन
जय कुमार सोनी
शहडोल बुलेटिन, जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार पुलिस प्रशासन चप्पे चप्पे पर नज़र बनाए रखने के लिए दर्जनो जिम्मेदार बीट प्रभारी संचार सुविधाओ से लैस साथ ही लाखो रूपए खर्च कर तीसरी आंख की निगरानी पहरा दे रही है जिससे पता नहीं जनता को कितना लाभ मिला दिखाई देता नही है लेकिन एक बात की तारीफ करनी होगी की दुपहिया, तीन पहियों के चालन सिग्नल तोडने पर घर पहुंचाने में कारगार साबित हो रहा है वहीं दूसरी ओर अमलाई बुढ़ार थानांतर्गत कोयला, कबाड़ एवं रेत के अवैध उत्खनन के परिवहन करने वाले लोगों को मानो एनओसी जारी कर ग्रीन सिग्नल दे दिया गया है हद तो हो जाती हैं जब जिसकी अमलाई ओपीएम के दो बडे निजी स्कूल मे हजारों की संख्या में पढ़ रहे हैं वही जमीन के ठीक नीचे अवैध खनन माफिया काले हीरे के तश्करी कर मुनाफा कमाने के लिए हजारों बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती हैं स्कूल के आसपास के इलाकों में जमीन खोखली की जा रही हैं इतना ही नहीं जमीन पर विस्फोट कर बंद खदान से ताबड़तोड़ दिन रात कोयला निकाला जाना निश्चित तौर पर दो स्कूल कॉनवेंट स्कूल एवं डीव्हीएम स्कूल को कब जमीदोज कर हजारों बच्चों की जान खतरे में डालने वाली घटना के रूप में सामने आ जाए कहा नहीं जा सकता. जिसे जाने क्यो स्थानीय प्रशासन अनजान है
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भरत नौटिया बड़े ही काबिल संवेदनशील अमलाई थाना एसएचओ हैं जिन्होंने बेहद पेचीदगी भरे घटनाक्रम को सुलझाने में कामयाबी भी मिली जिसमे अपहरण, हत्या एवं बेलगाम रेत परिवहन शामिल हैं परंतु कुछेक तथाकथित लोगों से अमलाई थानांतर्गत पदस्थ सिपाहियों की तिकड़म के चलते झगरहा कॉनवेंट स्कूल के बीच दिन के उजाले से लेकर रात के अंधियारे तक यहा होने वाला अवैध कोयला खनन की बिछी बिसात और माफिया की हरकत को शायद छुपाया गया है वरना हजारों बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती हैं स्कूल के आसपास ज़मीन के नीचे से कोयला निकाला जा रहा है स्कूल लंबी छुट्टी के बाद महज चंद दिनों में खुलने वाले हैं जिन पर त्वरित कार्यवाही सहित माफियाओ पर शिकंजा कसा जाना चाहिए था.
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कालरी प्रबंधन की माने तो हर बार मुहाने बद कर दिए जाते हैं परंतु यह स्थानीय लोग मानते नही, वही कॉनवेंट, डीव्हीएम स्कूल ने भी मामले में प्रशासन को अवगत कराया है कुल मिलाकर प्रशासन की सख्ती की दरकार है कुछ लोगों ने दबंगई के आधार पर तो कुछ लोगों राजनीतिक संरक्षण के चलते प्रशासन की कार्यवाही से बच निकलते है हालांकि जब बात जो स्कूल मे पढने वाले मासूम बच्चों की तो मामले की गंभीरता से लेना होगा, इन हजारों पढने वाले बच्चों ने कुछ बच्चे पुलिस सिपाहियो और अधिकारियों के भी निश्चित होगे. बावजूद भारी स्कूली बिल्डिंग का बोझ खोखली जमीन कैसे उठा सकती है एक अहम सोचने वाला पहलु है
जनचर्चाए यह भी है कि कॉनवेंट स्कूल से लगे एक ठेकेदार ने पास बहुत कम समय पर आधुनिक मशीन समेत कई वाहन खरीदा है जिससे कोयला खनन माफिया पेट्रोलिंग ट्रांसपोर्टिंग करते है ये अमूमन कोयला पिकअप और मेटडोर से निकालकर ईटाभट्टे और केमिकल फैक्ट्री तक पहुँचने के लिए झगरहा तिराहा श्रीवास्तव होटल में लगे सिपाहियों को लंमसम पंच अंको की राशि मे मैनेज कर रखा है अब देखना यह है कि स्थानीय एसएचओ भरत नौटिया समेत नवागत पुलिस कप्तान बच्चों की जान खतरे में डालने वाले कोल माफिया पर कब तक अंकुश लगा पाते हैं
शहडोल बुलेटिन बच्चो की जान खतरे में डाल कर कोयला खनन करने वाले माफियाओ की इस हरकत की निंदा करता है यदि आपके पास इससे जुडी जानकारी है हमसे साझा करना चाहते हैं तो व्हाट्सएप करे 9575511705 पर. गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध.
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