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शनिवार, 7 सितंबर 2019

अतिक्रमण: जिले के तालाबों पर बेजा कब्जा ना हटाया तो मिलेगी जल संकट से जूझती लाचार जिंदगी कार्यवाही की मांग



अतिक्रमण: जिले के तालाबों पर बेजा कब्जा ना हटाया 

तो मिलेगी जलसंकट से जूझती लाचार जिंदगी

कार्यवाही की मांग  



सिटी डेस्क 
शहडोल बुलेटिन। राज्य शासन द्वारा प्रदेश की शासकीय भूमियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान के तहत अब शासकीय भूमियों पर बने तालाबों को भी अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्णय लिया गया है।

सूत्र बताते हैं राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि अतिक्रमण का स्वरूप कैसा भी हो अतिक्रमणों को प्राथमिकता से बेदखल किया जाए। जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रत्येक तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपने-अपने क्षेत्र के पटवारी हलकों में स्थित तालाबों की सूची ग्रामीण पटवारियों से सात दिनों में प्राप्त कर लें। सूची में यह जानकारी भी लें कि तालाब किस सर्वे नंबर पर कितने क्षेत्रफल पर स्थापित है और यदि इस पर किसी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया गया है तो सर्वेक्षण के आधार पर अतिक्रमण हटाने का प्रकरण दायर करें।


निर्देशों में कहा गया है कि अतिक्रमण के कई स्वरूप हो सकते हैं जैसे कि शासकीय तालाबों के सार्वजनिक निस्तार व उपयोग को स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति द्वारा बाधित कर उसका उपयोग व्यक्तिगत रूप से करना, तालाबों पर बिना किसी अनुमति के सिंघाड़ों की अथवा अन्य प्रकार की खेती करना तथा तालाबों की भूमि पर पानी न रुकने के कारण उसमें खेती करना। अतिक्रमण का कोई भी स्वरूप हो सभी अतिक्रमणों को प्राथमिकता से हटाया जाए।

प्रदेश के सभी कलेक्टरों को अतिक्रमण कार्यवाही की मासिक समीक्षा करने और की गई कार्रवाई से शासन को नियमित रूप से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अतिक्रमण रोकने वृक्षारोपण उपाय
अतिक्रमण रोकने का सबसे अच्छा उपाय है तालाब किनारे पौधरोपण किया जाये। दो साल पहले एनजीटी ने तालाबों के संरक्षण व संवर्धन के लिए अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था तो कब्जा रोकने पौधरोपण करने भी कहा था। वहीं निगम द्वारा हर साल अपने बजट में पौधरोपण करने की भी योजना शामिल की जाती है, लेकिन निगम के जिम्मेदार इस ओर ध्यान ही नहीं देते, अगर तालाब किनारे पौधरोपण हो तो अतिक्रमण होने से तालाबों को बचाया जा सकता है।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश क
सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा तालाब, पोखरेल या फिर किसी तरह की सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा न किया जाए। ऐसा होने पर कार्रवाई की जाए पर अफसर इस पर ध्यान नहीं देते। शहर के छह से ज्यादा तालाबों के बड़े भाग पर कब्जा कर रिहायशी कालोनी बना दी गई है। जिसमें बिल्डर की बहुमंजिली इमारतें तान कर तालाब पोखरण का अस्तित्व मिटाने पर आमादा है शहर में लगे बडे बडे होल्डिंग विज्ञापन की चकाचौंध में आमजन अंजान है कि बिल्डरो ने किस प्रकार की भूमि पर निर्माण कराया है हालांकि शासकीय प्रयोजनों में टीएनसीपी, समेत रेरा के सख्त नियम आमजनों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही बनाएं गए हैं। मामले में किसी भी बिल्डर की बहुमंजिली इमारतें तालाबों या शासकीय प्रयोजनों की जमीनो पर नज़र आए तो विभाग अविलंब कार्यवाही करता है। शहडोल जिलामुख्यालय पर ही  यद्यपि इस तरह तालाबों के अस्तित्व खतरे में है तो निश्चित रूप से गहराते जलसंकट से निपटना मुश्किल होगा।
बहरहाल देखना होगा कि जिले के जिम्मेदार इस तरह के नियम विरूध निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। जिससे भविष्य में जलसंकट जैसे हालात निर्मित ना हो।


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