अतिक्रमण: जिले के तालाबों पर बेजा कब्जा ना हटाया
तो मिलेगी जलसंकट से जूझती लाचार जिंदगी
कार्यवाही की मांग
शहडोल बुलेटिन। राज्य शासन द्वारा प्रदेश की शासकीय भूमियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान के तहत अब शासकीय भूमियों पर बने तालाबों को भी अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्णय लिया गया है।
सूत्र बताते हैं राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि अतिक्रमण का स्वरूप कैसा भी हो अतिक्रमणों को प्राथमिकता से बेदखल किया जाए। जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रत्येक तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपने-अपने क्षेत्र के पटवारी हलकों में स्थित तालाबों की सूची ग्रामीण पटवारियों से सात दिनों में प्राप्त कर लें। सूची में यह जानकारी भी लें कि तालाब किस सर्वे नंबर पर कितने क्षेत्रफल पर स्थापित है और यदि इस पर किसी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया गया है तो सर्वेक्षण के आधार पर अतिक्रमण हटाने का प्रकरण दायर करें।
निर्देशों में कहा गया है कि अतिक्रमण के कई स्वरूप हो सकते हैं जैसे कि शासकीय तालाबों के सार्वजनिक निस्तार व उपयोग को स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति द्वारा बाधित कर उसका उपयोग व्यक्तिगत रूप से करना, तालाबों पर बिना किसी अनुमति के सिंघाड़ों की अथवा अन्य प्रकार की खेती करना तथा तालाबों की भूमि पर पानी न रुकने के कारण उसमें खेती करना। अतिक्रमण का कोई भी स्वरूप हो सभी अतिक्रमणों को प्राथमिकता से हटाया जाए।
प्रदेश के सभी कलेक्टरों को अतिक्रमण कार्यवाही की मासिक समीक्षा करने और की गई कार्रवाई से शासन को नियमित रूप से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बहरहाल देखना होगा कि जिले के जिम्मेदार इस तरह के नियम विरूध निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। जिससे भविष्य में जलसंकट जैसे हालात निर्मित ना हो।


