OMG....नाबालिग कोख में 7 माह का गर्भ लेकर पहुँची देवांता हॉस्पिटल
क्या छिन गई मासूम की मासूमियत, मामले में उठ रहे हैं अनसुलझे सवाल...
इनवेस्टेगेशन डेस्क
शहडोल बुलेटिन। आदिवासी अंचल की गरीब बेटी की मासूमियत कौन छीन रहा है किन दलालों ने उसकी मासूमियत को अपने कमाई का जरिया बना लिया है आज यह प्रश्न घटित एक घटना के संदर्भ में बोली जा सकती है यह घटना अमलाई क्षेत्र में रहने वाली एक 14 साल 8 माह की बच्ची की कहानी है जिसके गर्भ में 7 माह का नवजात पल रहा था। यह गर्भ कहा से किसका, कैसे आया इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन दलालों ने अपनी कमाई के लिए बुढार क्षेत्र के जांच केंद्रों में एक नही दो-दो बार सोनोग्राफी करा कर इलाज कराने का खेल खेला गया जब कल्पना (परिवर्तित नाम) दलालों के माध्यम से शहडोल के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए आए तो सूत्रों के माध्यम से जानकारी मीडिया तक पहुंची। इस जानकारी के बाद महिला बाल विकास आनंद अग्रवाल एवं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारो से जानकारी साझा कर कार्यवाही की बात की गई तो घंटों टाल-मटोल किया गया। जिसके बाद मामले से जिले के संवेदनशील कलेक्टर ललित दाहिमा को अवगत कराया गया। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर द्वारा तुरंत एक जांच टीम उस निजी अस्पताल में भेजी। जिसके बाद बौखलाए अस्पताल प्रबंधन ने गर्भावस्थामें आई किसी भी नाबालग के आने की बात सिरे से खारिज करते हुए मामले में पर्दा डालने का प्रयास किया। हालांकि पूरे मामले में जो जांच चल रही है उसमें उस नाबालिग कल्पना (परिवर्तित नाम) की लड़की द्वारा गर्भपात करा लेने की पुष्टि छिपाई परंतु है नाबालिग लड़की की ओपीडी आने के अहम दस्तावेजो को जब्त कर लिया गया है लेकिन यह गर्भ कहां कैसे क्यों आया इस बात की जानकारी अभी तक मीडिया तक नहीं पहुंची।
हॉस्पिटल में क्या हुआ....
जिले के प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में से एक वेदांता में उस बच्ची को कौन लाया उसका वहां क्या इलाज हुआ किसने इलाज किया और जांच टीम से पहले वह बच्ची कहां चली गई किसने इसकी सूचना पहले से ही आखिर किसने दे दी यह सभी प्रश्न अभी अपने आप में बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं जिसकी पुष्टि किसी बड़ी जांच के बाद ही हो सकती है मीडिया की सूचना पर संवेदनशील कलेक्टर ललित दाहिमा द्वारा जैसी फौरी कार्रवाई आज की गई उसे देख कर यही कहा जा सकता है कि मामले का खुलासा जल्द से जल्द पूरा हो जाएगा और दोषियों पर उचित कार्रवाई जरूर होगी।
रजिस्टर में उम्र की गलत जानकारी...
देवाता अस्पताल के एंटी रजिस्टर में नाबालिक बच्ची की उम्र गलत दर्ज की गई थी जिसे एसडीएम सोहागपुर द्वारा चिन्हित भी किया गया है इस निशानदेही से अस्पताल प्रबंधन और दलालों द्वारा किए जा रहे गैरकानूनी कार्यो का अनुमान लगाया जा सकता है अस्पताल प्रबंधन अभी तक कोई भी बात स्वीकारने को तैयार नहीं है वही अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करता दिख रहा है। परंतु इस मामले में जांच-पड़ताल के साथ सूक्ष्मता के अस्पताल के दस्तावेजों का अवलोकन किए जाते हैं तो सरकारी तंत्र की मिली छूट और लूट की सच्चाई सामने आ जाएंगी।
पहले भी लग चुके आरोप...
जिले के सीएमएचओ डॉ राजेश पांडे और वेदांता अस्पताल के डॉक्टर वीके त्रिपाठी साथ में काम कर चुके हैं वही घटना में सीएमएचओ की कार्यशैली कहीं ना कहीं उन्हीं संबंधों की याद ताजा कर देती है सोहागपुर एसडीएम जहां सभी बिंदुओं की बारी जांच कर रहे हैं वही डॉ राजेश पांडे कहीं ना कहीं अपने पुराने संबंधों को निभाने मैं मशगूल दिख रहे थे। डॉ बीके त्रिपाठी का विवादों से कुछ पुराना रिश्ता नजर आता है पहले अभी साईं कृपा अस्पताल में कई विवादों से घिरे डॉक्टर त्रिपाठी रहे हैं जिनके शहडोल से लेकर उमरिया जिले में दर्ज रिकार्ड आज भी मौजूद है लेकिन आज वेदांता अस्पताल के डॉक्टर होने के नाते भी कुछ वही नजारा देखने को मिल रहा है। कहते हैं डाँक्टर भगवान होता है और बीमार को नया जीवन देने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखता है लेकिन यहां स्थित बिलकुल विपरीत है।
हॉस्पिटल प्रबंधन प्रतिक्रिया.....
हमारे हॉस्पिटल में इन नाम की कोई लडकी नहीं आई।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया.....
शिकायत आधार पर देवांता हॉस्पिटल की जांच की जा रही है नाबालिग लड़की के गर्भपातकी जानकारी लगी है जिसकी जांच कर रहे हैं यहां नाबालिग (कल्पना) के आने की पुष्टि हुई हैं।
क्या कहता है कानून .....
भारत सरकार ने 1971 से महिलायों को गर्भपात (यानी सफाई) करने की अनुमति दी है। कानून “M.T.P. एक्ट 1971” के अनुसार कोई भी महिला 20 हफ्ते (5 महीने) तक के गर्भ की सफाई करवा सकती है। परंतु यहां महज 14 वर्ष की नाबालिग के गर्भ में 7 माह के भ्रूण की अवैध तरीके से तथ्यों को छिपाकर, नाबालिग लड़की को सोनोग्राफी, ओपीडी के दस्तावेजों में कही 17 तो कही 19 दर्शाई गई है। संबोधित विभाग के जिम्मेदार सीएमएचओ का तर्क है कि गर्भपात इस नाबालिग का वैध है जबकि कानूनन यह कृत्य जघन्य अपराधों की श्रेणी में आता है। शासन ने गर्भपात कराने के नियम निर्धारित कर रखे हैं। 20 सप्ताह से ज्यादा का गर्भ होने पर मेडिकल बोर्ड और न्यायालय की अनुमति के बाद ही गर्भपात किया जा सकता है।
गर्भ समापन अधिनियम, 1971 एवं संशोधित अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार इस कानून का उल्लंघन करने पर 2 से 7 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियॉं जिन्हे अधिनियम के अन्तर्गत कानून का उल्लंघन माना गया है, निम्न प्रकार है.-
गर्भ समापन अधिनियम, 1971 एवं संशोधित अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार इस कानून का उल्लंघन करने पर 2 से 7 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियॉं जिन्हे अधिनियम के अन्तर्गत कानून का उल्लंघन माना गया है, निम्न प्रकार है.-
- गैर पंजीकृत चिकित्सक द्वारा समापन का कार्य किया जाना।
- सरकारी अस्पताल या सरकार की ओर से अधिकृत चिकित्सा केन्द्रो के अतिरिक्त किसी भी अन्य स्थान पर गर्भ समापन किया जाना।
- सरकारी अस्पताल अथवा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल के अधिकृत डॉक्टर से ही सेवायें लें। किसी भी स्थिति में नीम हकीम के पास न जावें।
- बार-बार गर्भपात करवाना हानिकारक है। इससे मॉं के स्वास्थ्य को खतरा भी हो सकता है। इसकी वजह से अगले बच्चे के जन्म के समय रक्त स्त्राव ओर दर्द की तकलीफ हो सकती है। इसे परिवार नियोजन का साधन नहीं समझना चाहिए।
- यदि गर्भ समापन जरूरी है तो इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। 12 सप्ताह के बाद गर्भपात कराया जाना जोखिमपूर्ण होता है इस हालत में पेट का ऑपरेशन करना होता है और यह दो डॉक्टरों की सलाह से ही किया जा सकता है। इस समय अस्पताल मे भर्ती भी रहना पडता है।
मीडिया ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियोंको निभाया है बाकी जांच और कार्रवाई पहलुओं से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की ईमानदारी पर निर्भर करेगा। हमने मानवीय संवेदना को समझते हुए विशेष संरक्षित जाति की नाबालिग लड़की का गर्भावस्था का कारण एव दोषी, सहयोगियों की भूमिका का खुलासा किया है जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारो की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे। अब देखना यह होगा कि इलाज के लिए आई नाबालिग लड़की के साथ क्या हुआ और आखिर सात माह के भ्रूण का मुनाफाखोरो ने क्या किया। इन सब के बीच 14 वर्षीय नाबालिग लड़की का जान जखिम किसी को नहीं दिखाई दे रहा है।
हॉस्पिटल प्रबंधन प्रतिक्रिया.....
हमारे हॉस्पिटल में इन नाम की कोई लडकी नहीं आई।
बी.के. त्रिपाठी
प्रबंधक
देवांता हॉस्पिटल, शहडोल
प्रशासनिक प्रतिक्रिया.....
शिकायत आधार पर देवांता हॉस्पिटल की जांच की जा रही है नाबालिग लड़की के गर्भपातकी जानकारी लगी है जिसकी जांच कर रहे हैं यहां नाबालिग (कल्पना) के आने की पुष्टि हुई हैं।
धर्मेन्द्र मिश्रा
एसडीएम, सोहागपुर
शहडोल




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