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माफियाओं ने सोनटोला में मचाया तांडव कांग्रेसी नेताओं के विरोध के बावजूद बेखौफ़ अवैध खनन, परिवहन
प्रशासनिक कार्यवाही शून्य
रेत माफिया स्थानीय रोजगार छीन कर रहे मशीनों से नदियों का सीना छलनी
@सिटी डेस्क
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शहडोल बुलेटिन। अवैध कारोबारियों पर नकेल कसनें की कवायद में जुटी कमलनाथ सरकार लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही है, जिले के मुखिया से लेकर मैदानी स्तर पर काम करनें वाले अधिकारियों द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है लेकिन जिले में अभी भी कई स्थानों पर ठोस कार्यवाही की दरकार है ।
मामला जिले के गोहपारु थाना ईलाके के सोन टोला रेत खदान का है , जहां रेत माफिया बेखौफ नियमों को ताक पर रख रेत का उत्खनन कर लाखों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचानें के साथ ही अपराधिक घटनाओं को न्यौता देते नजर आ रहे हैं।
जिले के सीमा से लगे इस खदान में जिले के मुखिया द्वारा हाल ही में बड़ी कार्यवाही भी की गई लेकिन कार्यवाही का असर 24 घंटे भी देखनें को नहीं मिला।
और कार्यवाही के दूसरे ही उक्त खदान से रेत का उत्खनन किया जानें लगा।
क्या है पूरा मामला:-
जिले में सरकार के नियमानुसार मार्च 2020 तक रेत आपूर्ति की को ध्यान में रखते हुये पंचायतों द्वारा रेत खदान संचालन की अनुमति व दी गई है। कमलनाथ सरकार की नई रेत उत्खनन की नई नीति के तहत विभिन्न जिलों में रेत खदानों की निलामी का कार्य पूरा किया जा चुका है लेकिन कई ऐसे जिले भी है जहां अब तक रेत खदानों की निलामी अब तक नहीं हो सकी है इन जिलों में शहड़ोल भी शामिल है ऐसी स्थिति में शासकीय विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न ना हो इसलिये रेत आपूर्ति का जिम्मा पंचायतों को दिया गया है।
लेकिन इन पंचायतों की खदानों पर कुछ दबंगों नें इस कदर कब्जा जमा लिया है कि ग्राम पंचायत के कर्ताधर्ता मूक दर्शक बनकर यह पूरा खेल देख रहे हैं और इन दंगों के हाथ की कठपुतली बन गये हैं।
क्या कहते हैं नियम:-
इन खदानों का पंचायतों को आवंटन के साथ ही इनके संचालन के लिये शासन स्तर पर दिशानिर्देश जारी किये गये हैं जिसके अनुरुप रेत उत्खनन किया जाना सुनिश्चित किया है ।
इन नियमों में यह स्पष्ट है कि पंचायतों द्वारा आवंटित व संचालित खदानों का संचालन पंचायत में नियुक्त शासकीय कर्मचारी करेंगे, जिसका एक यूजर आईडी व पासवर्ड भी होगा इसके साथ ही इन खदानों पर रेत उत्खनन मैनुअल तरीके से किया जायेगा जिसके नदियों के स्वरुप परिवर्तन ना हो, लेकिन इन खदानों पर इन नियमों कि खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
मशीनों का बेखौफ खेल:-
जिले के ज्यादातर इन पंचायत की खदानों में स्थानीय स्तर पर रहनें वाले किसी न किसी दबंग नें कब्जा जमा लिया है । जानकारी के मुताबिक कहनें को तो पंचायत को आवंटित रेत खदानें पंचायत स्तर पर बैठे कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाना तय है जिसके लिये यूजरआईडी व पासवर्ड भी दिये गये हैं लेकिन पंचायत कर्मियों से उक्त संचालक सांठ- गांठ कर मनमर्जी की तर्ज पर रेत उत्खनन कर रहे हैं, जिसके चलते ये रेत कारोबारी बकायदे मशीनों से नदियों का सीना छलनी कर लाखों की रेत समीपी जिलों में खपा रहे हैं।
रात में रेत का कारोबार:-
सरकार की मंशा थी कि रेत के इस कारोबार से राज्य सरकार को राजस्व मिलेगा इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे, लेकिन रेत कारोबारियों नें शासन की इस मंशा को धता बताते हुये पूरे कारोबार से ना स्थानीय स्तर के रोजगार को नष्ट कर दिया बल्कि इन पंचायत खदानों पर इस तरह कब्जा जमा लिया कि यह खदानें आपराधिक गतिविधियों का गढ़ बन चुके हैं, इन परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर आम जन जानें से भी डर रहे हैं।
दूसरी तरफ माफिया पूरे ईलाके में खौफ कायम कर बेखौफ रेत की तस्करी करनें पर आमादा है।
प्रशासनिक कार्यवाही का नहीं है डर:-
ऐसा नहीं है कि इन खदानों पर प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की गई लेकिन इन माफियाओं को इन कार्यवाहियों का डर नहीं है। हाल ही में जिले के खनिज अमले के साथ ही जिले के मुखिया द्वारा रेत उत्खनन को लेकर बड़ी कार्यवाही की गई थी , लेकिन कार्यवाही के महज 24 घंटे बाद ही माफिया रेत उत्खनन में जुट गये।
जानकारी के मुताबिक इस बड़ी कार्यवाही के बाद से ही रेत उत्खनन के कार्य में लगे माफियाओं के गुर्गे कार्यालयों के चक्कर काटनें में लग गये थे, लेकिन लेकिन प्रशासनिक अमले की सख्ती देख यह माफिया निचले स्तर के अधिकारियों से सांठ-गांठ कर फिर से इस कार्य में लग गये हैं।

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