@बंटी/बबली पार्ट02: पति-पत्नी की दुधारू गाय बना छात्रावास @हाईजेक
●पुत्र से शिकायतकर्ता को दिलवाई जाती है धमकियां
विनय शुक्ला
9407813266
शहडोल बुलेटिन। टेटका में कस्तूरबा गांधी छात्रावास एवं विद्यालय में पति-पत्नी ने मिलकर नियमों को ठेंगा दिखाने का काम किया है और जिस-जिस व्यक्ति ने इस गलत कार्यों के प्रति आवाज उठाई है, तो उसके गुण्डा पुत्र ने उन्हें धमकाने भी कार्य किया है। एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी वाली कहावत पति-पत्नी पर चरितार्थ हो रही है। पिछले कई वर्षों तक कस्तूरबा गांधी छात्रावास में घोटालों का खेल खेला जाता रहा और जब मामला कलेक्टर और कमिश्रर तक पहुंचा, तो छात्रावास की वार्डन पूनम सिंह का पति खुद भी एक शिकायती पत्र बनवाकर कलेक्टर और कमिश्रर के दरबार में पहुंचाने लगा। जबकि हकीकत कुछ और ही है। गौतरलब है कि घोटालों की नींव जिस तरह से रखी गई है, वह चौंकाने वाली है और इस पूरे मामले की जांच जयसिंहनगर विकास खण्ड के बीआरसी ब्रम्हानंद श्रीवास्तव ने की है। उनका जांच प्रतिवेदन पूरी कहानी कह रहा है।
क्या है गडबड झाला....
जयसिंहनगर विकास खण्ड के ग्राम टेटका में संचालित माध्यमिक विद्यालय एवं कस्तूरबा गांधी माध्यमिक विद्यालय एवं छात्रावास संचालित है। इस छात्रावास में बच्चों के मुंह के निवाले को छीनने का काम वहां की वार्डन ही कर रही है। गौरतलब है कि पूनम सिंह इसी छात्रावास में बतौर वार्डन कार्य कर रही हैं और उनका पति देवेंद्र सिंह इसी छात्रावास में एकाउण्टेंट की भूमिका निभा रहे हैं। पति-पत्नी ने मिलकर इस छात्रावास को खटमल की तरह चूसने का काम किया है। सरकारी धन की जिस तरह से होली खेली जा रही है, उस पर वारिस अधिकारियों का मौन, संदेहों के दायरे में है। आखिर ऐसा क्या है कि नियमों से खेल रहे इन लेखापाल एवं वार्डन पर कार्यवाही नहीं हो पा रही।
कमिश्रर तक पहुंचा मामला.....
कस्तूरबा गांधी छात्रावास में लेखापाल एवं वार्डन दोनों के किये धरे का मामला वहीं की पालक शिक्षक संघ की अध्यक्ष दुर्गावती गुप्ता ने जब बयां किया, तो वर्षों से जमे पति-पत्नी की चूलें हिल गईं। कलेक्टर के यहां लेखापाल देवेंद्र सिंह एवं वार्डन पूनम सिंह के मिले जुले खेल की शिकायत हुई थी और इसकी जांच तीन सदस्यीय दल के बीआरसी ने किया था। तो अनियमितताओं के जीते-जागते सबूत पाये थे और इस मामले को दबाने की कोशिश की गई। जांच के बाद सौंपी गई रिपोर्ट में अगर कार्यवाही कर दी गई होती, तो अब तक यह मामला इतना तूल नहीं पकड़ता। लेकिन जिस तरह से मामले को दबाया गया है वह चौंकाने वाला है।
फर्जी चेकों का रहस्य....
कस्तूरबा गांधी छात्रावास टेटका में पहले तो पुराने अध्यक्ष का हस्ताक्षर करवाकर सरकारी राशि को खुर्द बुर्द किया गया और बाद में वहां नये अध्यक्ष बनने के बाद जब लेखापाल एवं वार्डन की दाल नहीं गली तो उन्होने अध्यक्ष को ही फर्जी बताने का काम शुरू किया। लेकिन पहले तो कई चेक उन्होंने फर्जी रूप से काटकर रखे थे जिन्हे रोक दिया गया, लेकिन चेक क्रमांक 415800 राशि 3393 प्रेेम कुमार प्रजापति के नाम भुगतान कर दिया।
नियमों के साथ खिलवाड़....
शासकीय नियम यह बताते हैं कि जिस विद्यालय में पत्नी वार्डन के रूप में कार्य कर रही हो, उसी छात्रावास में बतौर लेखापाल पति कार्य नहीं कर सकता। ज्ञातव्य हो कि पति देवेंद्र सिंह का स्थानांतरण ग्राम बांसा के लिये किया गया था, लेकिन उसे अभी टेटका में ही रखा गया है। गौरतलब है कि देवेंद्र सिंह बांसा में शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं, लेनिक उनके मुंह में चेकों का खून लग गया है, इसलिये बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। पालक शिक्षक समिति की अध्यक्ष दुर्गावती गुप्ता ने जो शिकायतें की हैं अगर उसकी जांच हुई तो पति-पत्नी के सारे रहस्य उजागर होंगे।

