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गुरुवार, 2 अप्रैल 2020







इंसानियत: इलाहाबाद पैदल जा रहे मजदूरों को कराया बृजकिशोर नें कराया भोजन

Failure:सूचना के बाद भी बुढ़ार पुलिस ना करा सकी को इनके जानें इंतजाम

  • अतत: घंटो इंतजार के बाद ना मिला साधन पैदल रवाना

पीयूष राव
अमलाई बुलेटिन। वैश्विक महामारी मे देश में 21 दिन के लॉकडाउन के बाद लगातार मजदूर अलग - अलग स्थानों व राज्यों से मजदूर अपनें घरों की ओर जा रहे हैं। यह मजदूर साधन ना मिलनें से सैकड़ो किलोमीटर पैदल चलनें पर मजबूर है, लेकिन जगह - जगह इनकी सहायता के लिये पुलिस और समाजसेवी मौजूद हैं जो इन्हें भोजन करा रहें हैं और इनके गंतव्य तक पहुंचानें की व्यवस्था भी कर रहे हैं। कुछ ऐसे ही 21 मजदूर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से चलकर उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद जा रहे थे, जो ट्रेन की पटरियों के सहारे 03 दिन पैदल चलकर अमलाई पहुंचे। मजदूरों नें बताया कि किसी रेलवे ट्रैक निर्माण मे एक ठेकेदार के पास मजदूरी करते थे लॉकडाउन के बाद ना तो काम है ना ही भोजन इत्यादि की व्यवस्था ठेकेदार का फोन भी बंद है और गृह ग्राम की भी स्थिति अच्छी नहीं है इलाहाबाद (प्रयागराज) पहुंचने के सारे संसाधन ठप्प पडें है जिससे परेशान होकर वह ट्रेन की पटरियों के रास्ते 03 दिनों में यहां तक पहुंचे हैं।
 आखिर क्यों फेल हुई पुलिस.....
इन मजदूरों की जानकारी लगते ही ओपीएम के बृजकिशोर यादव नामक समाजसेवी नें इन्हें भोजन कराया और पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद इन मजदूरों की स्क्रीनिंग हुई और इन मजदूरों को इनके गंतव्य इलाहाबाद जानें के लिये बुढ़ार पुलिस से व्यवस्था करनें को कहा गया। लेकिन घंटों इंतजार के बाद जब पुलिस इनके लिये साधन उपलब्ध नहीं करा सकी तो मजदूर पैदल ही रवाना हो गये।
सवाल शहडोल बुलेटिन का....
गौरतलब हो कि इस मामले शहडोल से होकर गुजरने वाले मजदूर छोटे छोटे बच्चों को लेकर बेबसी के आलम में पैदल चलने को मजबूर है जबकि मध्यप्रदेश सरकार और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर द्वारा जारी मार्च 2020 के आदेश मे स्पष्टता से मजदूरों को जान जोखिम उठाना ना पडे जिले भर के आरटीओ (परिवहन विभाग) को निर्देशित किया है कि 10 बस स्टैंड बाय की स्थिति में और 24×7 के लिए तैयार 05 बस इस कोरोना वायरस संबंधी लॉकडाउन के अंतराल में दूसरे राज्यों तक मजदूरों को वापस लाने और पहुंचाने के लिए तैनात रखा जाए। जिले में इस आदेश का पालन कौन कराएगा समझ से परे है लोगों का आरोप है कि जिले में लगभग 500 मजदूरों के साथ कई दुधमूहे बच्चों ने शहडोल के इर्द-गिर्द शरण ले रखी है जिनका कोई रहनुमा संवेदनशील इस मुद्दे को लेकर धरातल पर दिखाई देता है नजर नही आ रहा है। 
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