विभागीय अफसरों की शह पर जारी है लाखों का हेरफेर..?
शहडोल: ट्रक ड्राइवरों के साथ मारपीट और विवाद के मामले में अब एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ रही है। सूत्रों और ड्राइवरों के आरोपों के मुताबिक, यह पूरा विवाद सिर्फ आपसी बहस या रंगदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे घटिया कोयले की आड़ में चल रहे बड़े खेल का नियोजित प्रोपेगैंडा और साजिश छिपी हुई है!
क्या है असली काला सच?
लो-क्वालिटी कोयले की हेराफेरी: ट्रक मालिकों और गिरोह द्वारा ट्रकों में जानबूझकर लो-कैटेगरी (घटिया किस्म) का कोयला लोड कराया जाता है, जबकि अच्छी क्वालिटी का कीमती कोयला किसी अन्य स्थान पर भेजकर हर दिन लाखों रुपये का डाका डाला जा रहा है।
सवालों के कठघरे में संबंधित विभाग: आखिर किसकी शह पर खदानों से लेकर सड़कों तक यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है? विभागीय अफसरों की चुप्पी और अनदेखी अब सीधे तौर पर उनके इस गठजोड़ में शामिल होने की ओर इशारा कर रही है।
गाली-गलौज और मारपीट का असली सच: जब ड्राइवरों ने इस फर्जीवाड़े और हेरफेर में शामिल होने से मना किया या आवाज उठानी चाही, तो उन पर दबाव बनाने के लिए मारपीट और गाली-गलौज का सहारा लिया गया।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें: कल तक दबंगई दिखाने वाले अब मीडिया और पुलिस के सामने सफाई देने की होड़ में हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या शहडोल पुलिस और प्रशासन इस गहरे कोयला सिंडिकेट, फर्जीवाड़े और विभागीय अफसरों की साठगांठ की तह तक पहुंचेगा, या यह मामला सिर्फ एक मामूली विवाद बताकर रफा-दफा कर दिया जाएगा?
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