शहडोल बुलेटिन। जिले में नगरीय प्रशासन एवं जिला प्रशासन की सैकड़ों सफाई कर्मियों की फौज है वर्ष भर से यहां के अलग-अलग इलाकों में देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प स्वच्छता मिशन के लिए समर्पित कार्ययोजना तैयार कर कचरा मुक्त शहर किए जाने एवं बजबजाती गंदगी से होने वाली बीमारियों से छुटकारा दिलाने का बेहतरीन प्रदर्शन कई समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए सामने आया है परंतु हकीकत बिल्कुल विपरीत है। नगरीय प्रशासन की सीमांतर्गत 03 दर्जन वार्ड है और कुछ सकरी तंग गलियों का तो कुछ शहर के पॉश इलाके में वर्णित होने के बावजूद भी पांडवनगर में ही साफ सफाई व्यवस्था चौपट है जिसे देखने और सुनने वाला कोई नहीं।
नगरीय प्रशासन समेत जनता जनार्दन के चुने हुए पार्षद भी इस चौपट साफ सफाई व्यवस्था पर अंकुश लगाने में असफल रहे हैं लेकिन यह कहां तक उचित है कि महीनों स्थानीय लोगों के सड़कों पर गंदगी पसरी हुई रहती है। सफाई कर्मियों की कमी का रोना रोकर शहरवासियों के स्वास्थ के लिए अपनी जिम्मेदारियों को टालने का काम किया जा रहा है।
इसी तरह पॉलेटिक्निक कॉलेज, इंदिरा गांधी कन्या महाविद्यालय से बीटीआई खेर माई मंदिर से होकर मूक बाधित बच्चों का स्कूल छात्रावास को जाता है यहां पहुंचने पर ऐसा महसूस होता है कि यह शहडोल की नहीं किसी गांव की गलियों से हम गुज़र रहें। क्या यही वास्तविक विकास है गाजर घास, खरपतवार, बड़े बड़े दुर्लभ पेड़ पौधे का जंगल दिन में कीड़े मकोड़े का खौफ खड़ा करता है और रात का तो पूछो ही मत। यद्यपि कोई हादशा हो जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
जिसके लिए इतना ही कहना बहुत है कि जिम्मेदारी नगरीय प्रशासन एवं जिला प्रशासन की होगी। वहीं निर्माणाधीन भवनों ने भी यहां सड़कों को निगलना शुरू कर दिया है जिस पर स्थानीय जनों को आने वाले समय में अतिक्रमण की भेंट चढ़ी हुई सड़क परेशानी का सबब ही बनेगी।





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