सत्ता में काबिज रहने के लिए ऐसा जनाधार - ShahdolBulletin

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शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

सत्ता में काबिज रहने के लिए ऐसा जनाधार


:ग्राउंड रिपोर्ट इन इलेक्शन:
राजनीति का अंतिम दांव साम-दाम-दंड-भेद
सत्ता में काबिज रहने के लिए ऐसा जनाधार 

पॉलिटिकल एनालिसिस
शहडोल बुलेटिन। जिले के मतदाताओं को लुभाने के लिए पार्टी के नुमाइंदों ने हर हथकंडा अपनाया है जिसका असर शुक्रवार रात से दिखाई देने लगा है। यह बात जो निर्वाचन समेत तमाम शासकीय अधिकारियों को भली भांति ज्ञात है। भले ही निर्वाचन आयोग ने इस विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों को चुनाव आयोग की गाइडलाइन के तहत काम करने की अपील कर नियमों के विरुद्ध कार्य करने पर ठोस कार्रवाई की बात सरकारी खबरों में की जा रही है निश्चित ही यह निष्पक्ष मतदान के लिए आवश्यक है इसके बावजूद यहां आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोगों के साथ शहर के मतदाताओं को लुभाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति पर उतारू यह पार्टी के नेताओं ने अपनी अपनी पार्टी को जीत दिलाने के लिए चुनावी बिसात बिछाई है।
वहीं दूसरी ओर प्रशासन सरकारी मशीनरी सहित तमाम अधिकारियों की फ़ौज के माध्यम से निष्पक्ष शत-प्रतिशत मतदान कराने के लिए गुब्बारे, पटाखे, मिठाईयां, क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी प्रतियोगिता, उपहार देने के साथ रंगोली प्रतियोगिता करा कर लाखों रुपए फूंक दिए गए हैं। इससे अच्छे स्वास्थ्य, निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया को कितना प्रभावित किया गया किसी से छुपा नहीं है। 
जिले में हर विधानसभा के बने तमाम सेक्टर में पैसा रूपए, कंबल, साड़ी, शराब, कच्ची, पक्की प्रतिबंध लगाने के बाद भी उपलब्ध है जिसके बारे में निर्वाचन आयोग एवं जिला मुख्यालय के जिम्मेदार को भली-भांति जानते हैं लेकिन इस विधानसभा चुनाव में धरातल पर हो वही रहा है जो दशकों पहले से चल रहा है। लोभ, लालच, भय एवं नशेड़ियों की दुखती रग का भरपूर इस्तेमाल करना।
इसमें कोई दोराय नहीं कि लोकतंत्र के महापर्व पर सरकार की सख्ती जरूरी, मीडिया का दायित्व है हमें भारत के संविधान के अनुच्छेद में वर्णित अच्छरश: पालन कराने की जिम्मेदारी जो पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए प्रयास करने चाहिए। वरना आजाद भारत के गुलाम नागरिकों की तस्वीरें देखने को मिलती रहेगी। जिसे चंद रूपए में बिकी हुई मीडिया दिखाएगी अंदाजा लगाया जा सकता है। 

आगे पढ़े अधिसूचना के बाद निर्वाचन आयोग के सख्त नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नेताओं की हक़ीक़त।


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