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साम-दाम-दंड-भेद 
        (भाग-01)

राजनीति का अंतिम ब्रंम्हात्र शराब सरेराह
अब मतदान निष्पक्ष कैसे हो बताएं निगहबान

                             

शहडोल बुलेटिन। मतदान का दिन करीब आते ही राजनीतिक दल प्रलोभन की बरसात करने में जुटे हुए हैं आदिवासी बहुल इलाका अंतर्गत भोले-भाले आदिवासियों को बड़ी आसानी से शराब, कंबल, साड़ी के साथ रूपए पैसे खर्च कर पार्टी अपने प्रत्याशी के लिए मतदान करने का दबाव बनाते हुए देखा जा रहा है। जनचर्चाओ की मानें जिले की जयसिंहनगर, जैतपुर विधानसभा क्षेत्र में तो कुछ ऐसा ही होने लगा है। चुनाव नजदीक आते ही शराब की पर्चियां बटने लगी हैं। दूसरी ओर जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग द्वारा भेजे गए प्रेक्षकों की निगाहें इन पर्चियों पर नहीं पड़ रही है। बताया जाता है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी ने मैनेजमेंट का जिम्मा डी-कंपनी को सौंप रखा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि यह पर्चियां भी डी-कंपनी से ही जारी हो रही हो। अभी तो क्वाटर की पर्ची सामने आई है, संभव है कि हाफ, फूल और कैरेट की पर्चियां भी बनी होंगी। जिससे लोकतंत्र के महापर्व के निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया एवं जिले की लोकप्रिय कलेक्टर अनुभा श्रीवास्तव के शत-प्रतिशत मतदान कराने की मंशा पर पानी फेरा रहा है यह दुख की बात है मतदान प्रक्रिया और मतदाता जागरूकता अभियान के तहत लाखों रुपए फूंक कर भी पार्टी जीत के लिए ऐसे हथकंडे अपनाए हुए हैं। जिले के जिम्मेदारों को गंभीरता पूर्वक ऐसी सेंधमार व्यवस्था के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाना चाहिए।


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