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गुरुवार, 11 जुलाई 2019

मप्र. के इस जिले में बेख़ौफ खनिज माफिया विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल बटुरा, झगरहा की अवैध खदान मे दब जाएगे बेकसूर...



फाइल फोटो 

मप्र. के इस जिले में बेख़ौफ खनिज माफिया 
विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल

फाइल फोटो 

बटुरा, झगरहा की अवैध खदान मे दबकर अक्सर बेकसूरो की हो जाती हैं मौत..?


फाइल फोटो 

  

जयकुमार सोनी
शहडोल बुलेटिन, जिला मुख्यालय से लेकर पडोसी जिले की सीमा से लगी तमाम नदी,  नालो में बेख़ौफ खनिज माफिया डाका डाल रहे हैं लेकिन इस ओर विभाग की सख्ती कितनी कारगार है इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि करोड़ो रुपए का शासकीय राजस्व का नुकसान करने वालों, नदी, नालो का स्वरूप बिगाड़ने वालो के तगड़े नेटवर्क या कहा जाए कि निजी आर्थिक स्वार्थ के बने गठजोड़ ने पदस्थ खनिज विभाग के किसी अधिकारी ने माफियाओ को चिन्हित कर शासकीय नुकसान की भरपाई (जुर्माना) नही कर पाए जबकि अब तक की गई शत-प्रतिशत कार्यवाही मे माफियाओ को पहले ही कार्यवाही की भनक लग जाती है या खुद विभाग के जिम्मेदार नमक का हक अदा कर देते है और सरकारी थाली में छेद करने के लिए जरा सी भी देर नही करते, सूत्र यह बताते है कि इस सुनहरी रेत के काले कारोबार से गुलाबी नोट की चमक से प्रभावित लोगों ने ईमान बेचे हैं वरना दो दर्जन से ज्यादा चैनमाउंटिग पोकलेन मशीन विभाग ने जब्त की होती, माफियाओ पर नकेल कसने की कुछ धरातल पर तश्वीर नजर आती जुर्माना तय कर नकली भंडारण बताने वाले परिवहन करने वाले माफियाओ पर गौढ़खनिज अधिनियम के तहत कार्यवाही सुनिश्चित कर करोड़ो रुपए राजस्व का नुकसान वसूली जैसी कार्यवाही अवश्य होती परंतु बीते दो वर्ष से अधिक समय में मीडिया ने तमाम माफियाओ की करतूत को उजागर किया जिस पर इसके उलट कार्यवाही मैनेजमेंट सिस्टम की भेट चढ़ गई खनिज विभाग का दस्ता जाता है और हाथ कुछ नहीं आता है 

अवैध खनन हुए रेत,  कोयला,  पत्थर के लिए जिले मे अब तक कोई जिम्मेदार नही तो क्या सोननदी की सीना छलनी करने आसमानी भूत-प्रेत आ रहे हैं और लगभग हर दिन करोड़ो रुपए की रेत रीवा, सतना से लेकर उतरप्रदेश के कई शहरों में शहडोल की सुनहरी रेत की 35 से 80हजार रूपए ट्रक का बोली लगाई जा रही है वही जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी पर सवाल जनप्रतिनिधियो ने भी उठाया है निश्चित तौर पर खनिज विभाग का दोहरा रवैयो की बदौलत पूरे प्रशासनिक व्यवस्था की मिट्टी पलीद हुई है जिसकी भनक संभवतः जिले के मुखिया को नहीं है 

न बिंदुओ पर जिला प्रशासन करे गौर.... 
  • बटुरा की बंद खदान से अवैध कोयला, सोन नदी के तट से अवैध रेत खनन बंद नही होता...?
  • झगरहा तिराहा अमलाई मे दो स्कूल के नीचे अवैध कोयला खनन माफिया थाना पुलिस गस्ती के दौरान बेरोकटोक परिवहन जारी है....? 
  • रोहनिया रेत खदान के नाम पर खोखली की जा रही सोन का अस्तित्व समाप्त किया जा रहा जबकि उक्त खसरे,  रकवे मे रेत थी ही नहीं वनभूमि दर्ज राजस्व पर खनन और अधिकारियों की चुप्पी आश्चर्यजनक ...? 
  • पकरिया, नवलपुर, गोहपारू, जयसिंहनगर,  ब्यौहारी मे संचालित कितनी पत्थर खदानो का निरीक्षण कर जुर्माना वसूली किया गया... ? 
  • ऑनलाइन पीजी मे खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हों रहे है शिकायतकर्ता को अनसुना किया जा रहा है 
  • कार्यवाही के नाम पर साल भर से प्रकरण लंबित में वाहन मालिकों का दुर्गति(भूखे मरने की कगार पर) का जिम्मेदार कौन ..?

निश्चित रूप से इनमे से किसी सवाल की कोई जवाब नहीं होगा, परंतु यह एक बड़ा सवाल हैं सूबे के संवेदनशील मुखिया शहर की सुख सुविधाओ से निकलकर गांव गांव ग्रामीण समस्याओं का समाधान करना चाहते हैं ताकि हर तपका न्याय से वंचित ना रह जाए.. वही मजे वाली बात यहा यह भी है कि जिला खनिज विभाग की कार्यवाही पकड़ी, छोड़ी पर चोर,  पुलिस खेल रही है और जब सख्ती बरतने की बात आती हैं तो पहले से सूचना देकर माफियाओ को चलता कर दिया जाता है हालाकि यह तमाम दाबे कारिंदो के फोन कॉल डिटेल से पूरी प्रमाणिकता के साथ जुटाए जा सकते हैं कि जुगाड़ का जिन्न किस किस को कितना उपकृत कर रहा है और बदनाम पूरा जिला प्रशासन हो रहा है 

गौरतलब होकि सोहागपुर थाना खनिज विभाग का सरकारी मैनेजमेंट सिस्टम का स्टोररूम हैं जिनकी डोर कलेक्ट्रेट में खनिज विभाग के कारिंदो के पास है सूत्रों के हवाले से खबर यह भी है कि सोमवार को खनिज विभाग से मिले प्रभार के दौरान आरआई ने रोहनिया में पकडी रेत लदी डग्गी ट्रक को सोहागपुर थाना छोडकर मैकी कोटमा गुड्डू महराज के क्रेशर मे सुरक्षित खडा किया और मामुली चालान पर छोड़ दिया, वही दूसरी ओर रेत परिवहन करने के लिए किस्तों में खरीदी डग्गी ट्रक मालिक 09 माह से माता के दरबार में हाजिरी दे रहे जिनकी सुनवाई आज तक लंबित है और क्यो हैं किसी ने पूछा ना किसी ने सुना जनचर्चाए यह भी है कि इस विभाग मे सारे चिंधी चोर रेत,  पत्थर माफिया बना दिए गए हैं और इधर निजी लाभ में कमी ना आए कुछ ठेकेदार भी बनाए गए हैं परंतु हरकत आज भी चोरी चकारी की है इन सब बातों के बीच सरकार का नुकसान हो रहा है किसी को चिंता नही है खुद की जेब कैसे गर्म हो इस बात का पूरा ख्याल रखा जा रहा है जिससे कही ना कही प्रशासनिक प्रतिष्ठा दांव पर है ...






(पार्ट#05 मे पढ़िए सारी खुदाई (ऱेत खनन) एक तरफ जोरू का भाई.....? 



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