मास्टरस्ट्रोक या फिर डैमेज कंट्रोल जिला कलेक्टर रेत, कोयला पर लगाम लगाने में विफलता के बाद अब तरजी़ह दे रहे हैं नशे के खिलाफ खोला मोर्चा ....
लीलाबाई के कष्टमोचन कलेक्टर ललित दाहिमा, बाकी तंगहालो का उपाय...?
- शासकीय व्यवस्था लचर, परेशान पहुच रहे हैं कलेक्ट्रेट
- सरकारी व्यवस्था पर सवाल, यहां मुँह देखी सुविधाएं
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| शहडोल : लीलाबाई की समस्या का समाधान कर कलेक्ट्रेट से विदा करते कलेक्टर श्री दाहिमा |
सिटी डेस्क
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शहडोल बुलेटिन, जिले भर में सरकारी तंत्र धरातल पर किस तरह काम करता है इसकी पोल बीते शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में पहुची लीला बाई खटीक ने खोलकर रख दी, जिला मुख्यालय अंतर्गत नगरपालिका वार्ड नंबर 8 इतवारी मोहल्ला की रहने वाली लीलाबाई खटिक, उनके पति ज्ञानचंद्र एवं वेवा पुत्री सपरिवार सीधा कलेक्टर ललित दाहिमा के दरबार में गुहार लगाना बेहतर समझा, जिले भर चर्चा शुरू हो चुकी है कि जिले के मुखिया बेहद संवेदनशील और जनता की परेशानी को हर, हर संभव मदद तत्काल करते हैं जिसके कारण न्याय की आशा दिखाई दी।
सरकारी योजनाओं का लाभ इलाके के लोगों को नहीं मिल रहा है तभी तो लोग कलेक्ट्रेट पहुचने लगे हैं इसका मतलब साफ है संबधित विभाग हाथ में हाथ धरे सरकारी वेतन और सुविधाओ का मात्र लाभ ले रहे, जिन्हें अब बैठेठाले वेतन उठाकर गरीब असहाय की उपेक्षा करने की निरंतर आदत सी हो गई है बहरहाल शुक्रवार अंगूरी खटिक ने मिलकर परिवार की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि काफी उम्र होे जाने के कारण पैरों से चलने में लीलाबाई को दिक्कत होती है तथा वह दैनिक कार्याे हेतु दो कदम भी चलने में असमर्थ है। चलने हेतु व्हील चेयर खरीदने के लिए आर्थिक तंगी के कारण भारी कठिनाई झेलनी पड़ रही है।
क्यिक रिस्पॉस....
उन्होने कलेक्टर से व्हीलचेयर दिलाने की बात कही। जिस पर कलेक्टर ने सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल एक व्हील चेयर मॅगाई और लीलबाई को सौपतें हुए कहा कि अब आपकाे चलने फिरने में सुविधा होगी, लीलाबाई ने व्हील चेयर पाकर कलेक्टर को धन्यवाद देते हुए कहा कि हमारी समस्या का मौके पर ही समाधान हो गया अब मैं अपने दैनिक कार्याें को करने में आत्मनिर्भर हो गई हूं।
सरकारी अस्पताल को निर्देश....
इस दौरान लीलाबाई के पति ज्ञानचंद्र ने भी अपनी वृद्धाव्यस्था में शारीरिक दुर्बलता होने पर कलेक्टर से मदद माॅगते हुए बताया कि उनका स्वास्थ्य खराब रहता है, वह चल नही पाते है तथा अस्वास्थ्य रहते है। जिस पर कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दूरभाष पर निर्देश देते हुए ज्ञानचंद्र को तत्काल निःशुल्क चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
रोजगार दो, करो फीस माफ...
उनकी पुत्री अंगूरी बाई ने माॅ-बाप की तंग हालात एवं आर्थिक विपन्नता की जानकारी देते हुए रोजगार की माॅग की जिस पर कलेक्टर ने उनसे आवेदन देने हेतु कहा और रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया। अंगूरी खटिक ने कलेक्टर को बताया कि हमारा पुत्र अंश कक्षा 6 वीं में जिला महिला समिति में अध्ययरत है परन्तु अर्थिक तंगी के कारण कई महीनों से स्कूल की फीस नहीं जमा करा पाने के कारण आगे की पढ़ाई में कठिनाई आ रही है। कलेक्टर ने अंश की फीस माफ करने के निर्देश प्राचार्य महिला समित शहडोल को देते हुए आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कहा। कलेक्टर ललित दाहिमा के द्वारा किये गये इन मददों से अभिभूत होकर खटिक परिवार के आॅखों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा और यह परिवार हॅसी -खुशी अपने घर को रवाना हुये।
मास्टरस्ट्रोक या डैमेज कंट्रोल...
नंबर वन पर नज़र डाले तो बीते दिनो जिला मुख्यालय से लेकर तमाम कलेक्ट्रेट के अधिकारियों को जैतपुर पहुँची बस ने कलेक्टर ललित दाहिमा के दरबार जनता के द्वार को खूब सराहा था, नंबर टू बुजुर्गो के साथ बिताया वक्त और अगले ही दिन एक बुजुर्ग के जन्मदिन मनाने के पहले पूरा मीडियातंत्र सेट किया की नायक की भूमिका कैसे गढ़ी जाए, अच्छा है और नंबर थ्री की बात हो तो लीलाबाई भी इस मास्टर स्ट्रोक की हिस्सा हैं यह सब कुछ हो रहा है मतलब किसी आश्चर्य और इत्तेफाक हैं हम समझ गए, वास्तविकता कहा जाए तो यह अलग बात है परंतु जानना जरूरी है कि यह अनोखी पहल नही थी प्रदेश के कई जिलो में प्रशासन ने गाँव गाँव न्याय पहुचे लोगों का सरकार और उसके कामकाज की समीक्षा और गुजरी सरकार से बेहतर दिखाने के लिए रहा यह प्रयास था बुद्धिमान भलीभाँति जानते हैं।
एक आप हो...एक वो..
निश्चित रूप से यह तमाशा नही था जो संवेदनशील कलेक्टर विकलांग महिला समस्या लेकर आई हैं सुनते ही चैंबर से नीचे स्वयं आकर सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग, रोज़गार समेत 06 वर्षीय बच्चे की बिना अवरोध शिक्षा के लिए प्रभावी निर्देश दिए, एक वो थे जो जूस पिलाकर लोकतंत्र का महापर्व को स्वीप कराने की कहानी गढ़ गए और एक आप...। राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे 02 विद्यालय जमीदोज हो सकते हैं सैकड़ों बच्चों की जानजोखिम मे है पर प्रशासन की ऑखो में पडे गुलाबी पर्दे कार्यवाही से रोकने की पूरजोर कोशिश करते है पर सफलता कोयला चोरी करने वालों के नसीब में है क्यूकि कोयला माफियाओ ने ढूँढ लिया जुगाड़ का जिन्न अब भला अवैध खनन, परिवहन मे क्या कौन कब कर सकता है
(पार्ट#05 मे पढ़िए सारी खुदाई (ऱेत खनन) एक तरफ जोरू का भाई.....?
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