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शहडोल बुलेटिन। संभाग के 304 ग्राम अनूपपर, 399 ग्राम उमरिया, 474 ग्राम शहडोल में आते हैं जिन्हें आबादी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सरकार के रहमोकरम पर जीवन यापन कर रहा है कहा जा सकता है हालांकि इस संभाग को आदिवासी बाहुल्य इलाके का तमका जरूर मिला है परंतु आजादी से अब तक संबधित विभाग के जिम्मेदारो ने इनके हिस्से का निवाले छीन छीन कर करोडों रूपये डकारने मे बडी मेहनत की है और इस संभाग के अंतर्गत आने वाले 03 जिले के बैगा आदिवासियों के विकास और कल्याण के लिए राज्य, केंद्र सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है लेकिन यहां स्थित बिलकुल कंट्रोल में है कोई आदिवासी बाहुल्य इलाके में विपरीत परिस्थितियों में होकर भी यहाँ अपने अधिकार के लिए खडा नहीं होता ना हिसाब किताब मांगता है भले ही किसी का व्यापार इनके पेट, और तन के कपडे, पैरों की चप्पलें, शौचालय के लिए आवंटित रुपयों को डकार जीएसटी वाला साहूकारी बता रहा हो।
आदिवासियों के लिए परोसे जाने वाले भोजन नाश्ता पानी जैसी सेवा में सोहागपुर खंड शिक्षा अधिकारी शिवसिंह चंदेल और बुढार खंड शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा को किसने जिम्मेदारी दी इसका खुलासा आज तक ना हो सका है और ना हो पाएगा। जहां दोनों अधिकारियों द्वारा सामग्री खरीदी के सभी नियमों कायदों को ताक पर रखकर अपनी खुद की दुकानों व रिश्तेदारों से बगैर टेंडर बिना कोटेशन सामग्री क्रय की गई और मनमाना भुगतान भी दिया गया सबसे मजेदार बात तो यह भी है जहां इसका सत्यापन भी खुद दोनों खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा किया गया। जैसा आरोप षिकायत मे लगाए गए है।
क्या है पूरा मामला.... दिनांक 30 मार्च 2018 को लालपुर हवाई अड्डे पर बैगा सम्मेलन सह विकास यात्रा का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जिले के दो खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा सहायक आयुक्त कार्यालय के शाखा प्रभारी एमएस अंसारी के साथ लाखों का बंदरबांट कर रिष्तेदारो को लाभ पहुचाने का आरोप लगाया गया था। बाजार की कीमत से अधिक का बिल बनवा कर सामग्री क्रय की गई तथा क्रय की गई सामग्री का ना तो टेंडर बुलवाया गया। और ना खुले बाजार से कोटेशन प्राप्त किया गया भ्रष्टाचार के आरोप में विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता की जांच के लिए शिकायत की गई है इस कारण दोनों ने सभी सीमाओं को लांघते हुए भ्रष्टाचार की सभी सीमाओं को पार किया है। बुढार के खंड शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा द्वारा पतंजलि स्वदेशी बाजार शहडोल से 11,350 बोतल पानी की 14 की दर से खरीदी का बिल बनवाया गया जबकि आज तक बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी पानी की बोतल का विक्रय नहीं करती है यदि दूसरी कंपनी की बॉटल ली गई है तो उसके अधिकृत डीलर से क्रय क्यों नहीं किया गया इसके साथ ही इनके द्वारा अपने नजदीकी रिश्तेदार सत्यनारायण तिवारी एवं राजभान द्विवेदी से हजारों पैकेट लंच पैकेट का फर्जी बिल बनवा कर शासन को धोखा दिया गया। इस कार्य में भी टेंडर कोटेशन की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई इन दोनों के पास फर्जी बिल में जिला प्रशासन की संलिप्तता इसलिए भी प्रतीत होती है कि खंड शिक्षा अधिकारी बुढार एवं सोहागपुर के द्वारा व्यय की गई राशि का सत्यापन इनके द्वारा स्वयं किया गया है।
मिठाई तो मिठाई डिब्बों को भी खरीद डाला... देश के इतिहास में शायद ऐसा पहला मामला होगा जो मिठाई की कीमत अलग और मिठाई की खरीदी के साथ डिब्बों की खरीदी अलग से की गई हो और उसका भुगतान भी लाखों में किया गया हो और तो और उन डिब्बों को पैक करने के लिए रबड़ की खरीदी भी हजारों रुपए में की गई हो ऐसा माजरा दोनों खंड शिक्षा अधिकारियों की प्रस्तुत भुगतान बिलो मे साफ-साफ देखा जा सकता है। अधिकारियो ने भी ऑख मूंद भुगतान होने दिया। सम्मेलन में शेष ब्यय के बिलो को जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा सत्यापन कराया गया है। इसी तरह खंड शिक्षा अधिकारी सोहागपुर के द्वारा 6 क्विंटल बर्फी एवं 4 क्विंटल नमकीन का फर्जी बिल बिना टेंडर बिना कोटेशन के मनमानी दरों से दो लाख पचास हजार रुपए का बनवाया गया है। इसके साथ ही जो डिब्बा मिठाई का दुकानदार मुफ्त में देता है उसे पॉच रुपए पचास पैसे की दर से 21 हजार डिब्बो का भुगतान एक लाख पंद्रह हजार पाच सौ रुपए किया गया। इन डिब्बो की पैकिंग के लिए इन मातहतो ने खरीद डाले इसमें लगाए जाने वाले रबड़ भी 7500 में क्रय किया जाना बताया गया है इसमें उल्लेखनीय है कि भोजन व्यवस्था में लेबर चार्ज के रूप में भी 80000 का बिल का भुगतान दिखाया गया है जबकि पूरा भोजन कंचनपुर छात्रावास में बनवाया गया था इनके द्वारा स्वयं अपने द्वारा किए गए व्यय का सत्यापन किया गया। जांच का प्रमुख बिंदु यह भी है कि इन्हें लंच पैकेट बनवाने का आदेश किसने दिया जबकि खाद्य विभाग को यह जिम्मेदारी कलेक्टर महोदय द्वारा दी गई थी साथ ही व्यय किए गए बिलो का सत्यापन जब आपूर्ति अधिकारी को करना था तो इन दोनों से व्यय का सत्यापन क्यों कराया गया।
गौरतलब होकि मामले मे संभाग के आयुक्त से षिकायत के बाद उपायुक्त अनुसूचित जाति व जनजाति को जांच के आदेष दिए गए थें। जिसके बाद उपायुक्त अनुसूचित जाति व जनजाति ने दो सदस्यी कमेटी बनाकर मामले की जांच अब तक कराई जा रही है परतु जानें अब तक मामलें को अधर किस लिए लटकाकर रखा गया है।
शिकायतकर्ता प्रतिक्रिया.....
मामले मे प्रमाणित भ्रष्टाचार किया गया है इस आर्थिक अपराध के लिए तत्काल एफआईआर कराने के निर्देष किए जाने चाहिए।
प्रदीप सिंह
वरिष्ठ काग्रेस नेता शहडोल
.........प्रतिक्रिया .....
मामले मे बिना फाइल देखे मै कुछ नही बता सकता हॅु। मेरी तबियत भी खराब और मै बाहर हॅू।
अशोक शर्मा
बीईओ. बुढ़ार
शहडोल
प्रशासनिक प्रतिक्रिया ..........
"आपके द्वारा मामले की जानकारी दी गई है हम दिखवाते है मामला अब तक लंबित क्यो है।
आर.बी. प्रजापति
कमिश्नर शहडोल



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