जल, जंगल और जमीन की जमीनी लडाई लडेंगा गोंगपा- तेजप्रताप
म.प्र. के इस जिले में ताबड़तोड़ खनन माफिया गठबंधन से त्रस्त आदिवासी
सिटी डेस्क
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शहडोल बुलेटिन। कहते हैं कि पुलिस चाह ले तो मजाल क्या कोई परिंदा भी पर मार दे, लेकिन पुलिस की मिलीभगत हो जाए तो काले धंधे करने वालों के वारे न्यारे हो जाते हैं। ऐसा ही वाक्या पुलिस पर चरितार्थ होता है। हालत यह है कि अभी ग्रामीणों के लिए बीते पंचवर्षीय मे अलग अलग योजनान्तर्गत बनी सड़क को आज ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रेलर, डंपर दर्जनों की संख्या में रात 10 बजे के बाद से अल सवेरे तक धड़ल्ले से परिवहन करते हैं। जिसके चलते ग्रामीणों मे भारी आक्रोश व्याप्त है।
जहां पुलिस के लाख सजग होने के बाद भी रेत माफिया अपने गोरखधंधे में सफल हो सक्रिय है। सुप्रीम कोर्ट के जारी निर्देश, एनजीटी सख्ती के शहडोल की इतिहासिक विराटनगरी के बासिंदे कुछ वर्षों मे बूद बूद पानी को मोहताज हो जाएंगे। कारण अवैध खनन के कारोबार में जुटे लोगों के लिए रेत खुले में पडी सोना बनी हुई है। जिसकी लूटपाट के लिए संबधित विभाग की सुस्ती की वजहों की जनचर्चा आम है। जैसे कि बिना अर्थ के सब व्यर्थ है।
स्थिति यह है कि अवैध रेत खनन कारोबारी सोन की सुनहरी रेत के लिए नियम कायदे कानून व्यवस्था मानो जेब (मैनेजमेंट) में रखते है। जिसकी बानगी ग्रामीणों और मीडिया के कवरेज के दौरान देखी जा रही हैं पुलिस एवं खनिज विभाग के गठजोड़ पर शोध एक बडे शोध की आवश्यकता है कि आखिर कैसे बेरोकटोक संचालित रेत का अवैध खनन कारोबारी ग्रामीणों विरोध एवं लगातार प्रिंट, इलेक्ट्रानिक एवं सोशल मीडिया पर प्रकाशित खबरों के बावजूद जिला मुख्यालय पर मायाजाल की बिसात बिछाए है।
खनिज, परिवहन तथा पुलिस विभाग की दबिश की बात अगर करें तो अवैध कारोबार में लगे लोगों को संरक्षण देने के लिए मीडिया की पैनी नज़र मे धूल झोक तू डाल डाल मैं पात पात की तर्ज पर बदस्तूर अवैध खनन, परिवहन का काम किया जा रहा है।
इसके बावजूद भी इन पर लगाम लगाने वाला जिला प्रशासन भी आखिर चुप्पी साधे मौन है। रेत के अवैध कारोबार में लगे माफिया का बुलंद हौसलों की अगर हम बात करे तो भुरसी, भटगाव से होकर जयसिहनगर की जीवनदायिनी नदी की बीच धारा से अंधाधुंध रेत खनन के लिए सड़क बना रहे हैं। जिससे हाइवे पर धड़ल्ले से 16 और 18 चका विशालकाय ट्रक के माध्यम से रेत दूसरे राज्यों में बिक्री के लिए आसानी से पहुंचा सकें।
ग्रामीण सजग होकर ट्रैक्टरों, ट्रकों को रूकवाते हुए पुलिस को सूचना दे रहे हैं। तो कहा जाता है कि खुद पकडो अवैध रेत खनन परिवहन करने वाले वाहन इतने तेज गति से चलते हैं कि सामने कोई आ जाए तो उसके चिथड़े-चिथड़े हो जाए।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अवैध रेत खनन कारोबारी तांडव की मीडिया मे प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेते हुए वन-वनस्पति, वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं ग्रामीण सडकों की दुर्दशा को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन की सूचना प्रशासन को दी कार्यवाही ना होने पर 16 दिसम्बर से धरना पर बैठने विवश होगे। आखिर आज से अनिश्चित कालीन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से लगभग 5 से 10000 की संख्या में समर्थक अवैध रेत खनन के विरोध का बिगुल फूंक दिया है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी प्रमुख पदाधिकारी के हवाले खबर यह भी है कि भटगाव, भुरसी ग्राम में अवैध रेत खनन कारोबारी मे चैनल रिपोर्टर शामिल हैं ऐसे चैनल जोकि पत्रकारिता की धुरी कहलाते हैं ऐसे चैनलो के रिपोर्टर भी शामिल हैं। जिन्होंने आदिवासी बाहुल्य इलाके की निष्पक्ष पत्रकारिता को कलंकित करने का काम किया है यहाँ आदिवासी समाज, ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को अक्सर मीडिया प्रशासन तक पहुंचाने का काम करता आया है। वही दूसरी ओर जिन्होंने अपनी चोरी और साठगांठ के लिए कई वाहनों को अनुबंध कर ताबड़तोड़ अवैध रेत खनन का कवरेज करने की बजाए हमाम मे नग्न होकर चाँदी काँट रहे है।
शहडोल बुलेटिन जल्द ही आपकी एचडी स्क्रीन पर ।।
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