दबंगई: स्थानान्तरण को दिखाया टेक्निकल इंस्पेक्टर ने ठेंगा, प्रबंधन को दागी TI की चुनौती
करोड़ो के घाटे मे कोयला खदाने, साहब की चाँदी, जांच की मांग
प्रदीप पाण्डेय
9893779923
शहड़ोल बुलेटिन। समूचे शहड़ोल संभाग में खनिज संपदा का अकूत भंडार है, इस उपलब्धता से ना सिर्फ संभाग की बल्कि पूरे प्रदेश व देश की अर्थव्यवस्था पर हमेशा बड़ा असर पड़ता रहा है। इतना ही नहीं देश व प्रदेश में बिजली बनानें से लेकर अनेक उद्योग हैं जहां इनकी आपूर्ति निरंतर इस जिले के कोयला खदानों से निकले कोयले के निर्यात से हो रही है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह कोयला खदानें मुनाफे कि बजाय मोटे नुकसान में हैं और इस दिशा में सुधार लानें के लिये प्रबंधन के उच्चाधिकारियों द्वारा निरंतर प्रयास भी किया जा रहा है , लेकिन निचले स्तर पर बैठे कुछ अधिकारी व्यक्तिगत हितों को सर्वोपरि मानते हुये लगातार ना सिर्फ नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि लगातार प्रबंधन को चूना लगानें का काम कर रहे हैं। बावजूद इसके प्रबंधन इन दागी अधिकारियों पर कोई ठोस कार्यवाही करता नजर नहीं आ रहा है जिससे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहा है।
प्रबंधन निभाता है यह जिम्मेदारी
कोयला उत्पादन के बाद सबसे प्रबंधन की सबसे अहम जिम्मेदारी यह होती है कि उत्खनित कोयला किस प्रकार है और किस ग्रेड का है जिसके आधार पर विभिन्न खरीददार कंपनियां उक्त कोयले की गुणवत्ता के आधार पर कोयले की खरीददारी करती है और उसका भुगतान होता है जिस आय से प्रबंधन के विभिन्न खर्चों का वहन होता है लेकिन यदि उक्त कोयले की बिक्री में किसी भी तरह की लापरवाही बरती जाती है तो प्रबंधन को इसके लिये मोटी रकम खरीददार को वापस भी करना पड़ता है।
यह है पूरी प्रक्रिया
कोयला खदानों से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा कोयले के खरीददार आवंटित आपूर्ति भण्डारण और उत्खनन मात्रा के आधार पर कोयले की ऑनलाइन बोली लगाते हैं, जिसका एक निर्धारित राशि कोयले की क्वालिटी व ग्रेड के अनुसार प्रबंधन तय करती है जिसमें प्रबंधन द्वारा यह बताया जाता है उनके यहां उत्खनित कोयले की क्वालिटी इस प्रकार की है और उसकी ज्वलनशील क्षमता क्या है, जिसके आधार पर बोलीदार क्रेता उक्त भण्डारण में अपनें आपूर्ति हेतु इसका विधिवत क्रय करता है और उस राशि का भुगतान करता है, जिसे क्रेता को निर्धारित समय में उक्त स्थान से उतना कोयला प्रदान किया जाता है जिसे वह विभिन्न माध्यम से परिवहन करता है।
काले कोयले का काला खेल
क्रेता द्वारा उक्त खरीदी किये गये कोयले को तय तारीख में उक्त स्थान से भुगतान उपरांत प्राप्त करना अनिवार्य होता है। खास बात तो यह है कि पूरी पारदर्शिता के साथ होनें वाले इस कारोबार में भी प्रबंधन के कुछ जिम्मेदारों द्वारा लाखों करोडो़ का खेल कर लिया जाता है, जानकारी के मुताबिक संबंधित कोयला खदानों से बोलीदार कोयला क्रयकर्ता को निविदा में वर्णित आधार पर कोयला प्राप्त हो सके इसके लिये प्रबंधन नें सैम्पलिंग से लेकर गुणवत्ता को लेकर व्यापक इंतजाम किये हैं जिसके लिये समस्त कोयला खदानों में तकनीकि निरीक्षक के रुप में एक अधिकारी भी नियुक्त होता है जिसके जिम्मे यह पूरा काम किया जाता है।
दागी पर सवाल फिर भी मेहरबान प्रबंधन
कोयला उत्खनन के बाद उक्त गुणवत्तापूर्ण कोयले की क्रेताकर्ता को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कोयला खदान में पदस्थ तकनीकि निरीक्षक की होती है। जिसके लिये तकनीकि निरीक्षक उत्खनितकोयले के भण्डारण से लेकर उक्त कोयले की सैंम्पलिंग कर उसके ग्रेड का निर्धारण कर उसे खरीददार फर्मों, कंपनियों को उपलब्ध कराता है। वहीं खरीददार द्वारा उक्त प्राप्त कोयले की ग्रेड में यदि किसी भी तरह कि विसंगतियां पाई जाती है तो वह कोयला प्रबंधन पर तयशुदा कोयली की आपूर्ति ना होने के एवज में प्रबंधन पर जुर्माना करन्ं के लिये स्वतंत्र होता है और ऐसा पाये जानें पर प्रबंधन को मोटी रकम क्रेता को बतौर भरपाई करनी पड़ती है। कुछ ऐसा ही मामला बीते कुछ वर्षों से बंगवार भूमिगत खदान में देखनें को मिल रहा है जहां पर वरिष्ठ तकनीकि निरीक्षक के रुप में पदस्थ एस.बी. सेनगुप्ता की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहा है।
जानकारी के मुताबिक कुछ ऐसी ही विसंगतियां पाये जानें पर बीते दिनों पत्र क्रमांक -SECL/MGR/BNG/2019/1570 दिनांक - 08/10/19 के माध्यम से खान प्रबंधक द्वारा उक्त वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक को चेतावनी देते हुये गुणवत्तापूर्ण कोयले की आपूर्ति हेतु निर्देशित किया गया था, जिसके बाद एस.बी. सेनगुप्ता द्वारा खानापूर्ति करते हुये घोलमोल जवाब भी प्रस्तुत किया गया लेकिन उनके द्वारा दिये गये जवाब में गुणवत्तापूर्ण कोयले की प्रदान ना किये जानें के संबंध में कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, जिसके बाद प्रबंधन नें
पत्र क्रमांक - SECL SAM/ABD/80/119/624 दिनांक 27/11/2019 द्वारा वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक एस.बी.सेनगुप्ता का स्थानांतरण सोहागपुर क्षेत्र के दामिनी कोयला खदान में कर दिया।
प्रबंधन मेहरबान या ऊंची पकड़ का दम
गौरतलब है कि प्रबंधन द्वारा कागजों में तो उक्त कार्यवाही करके यह बतानें का तो पूरा प्रयास किया कि उन्होनें इस दिशा में कार्यवाही कि है लेकिन इतने लंबे समय बाद भी एस.बी. सेन गुप्ता बंगवार कोयला खदान में कार्यरत हैं, प्रबंधन की इस सर्जरी को महज कागज का टुकड़ा मानते हुये उक्त वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक नें अब तक स्थांतरित स्थान का कार्यभार ग्रहण नहीं किया जिससे बंगवार कोयला खदान को प्रतिदिन लाखों रुपये का चूना लगातार लग रहा है। दूसरी तरफ प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी उक्त तकनीकी निरीक्षक पर इस कदर मेहरबान है कि कोई ठोस कार्यवाही करनें की बजाये मूक सहमति देते नजर आ रहे हैं, जिससे यह भी प्रतीत हो रहा है कि उक्त तकनीकि निरीक्षक के इस काले कारनामों में प्रबंधन के कई अधिकारियों की सांठ-गांठ है।
सूत्रों के हवाले से खबर यह भी है कि इलाके के कोयला माफिया से मधुर संबंध के चलते बीते दिनों बंगवार भूमिगत कोयला खदान के यार्ड में रखा कोयला 03 ट्रकों मे बाकायदा लोड करा खुद की मौजूदगी में दबंगई से रवाना किया। जिसके चलते जनचर्चा यह भी है कि विभागीय अधिकारियों से शीत यद्ध जारी है। इस तरह भ्रष्टाचार, लापरवाही के आरोप में लिप्त तकनीकी निरीक्षक के अंगद के पांव को किस ओर से मजबूती मिल जाती है खोज का विषय है।
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