खबर पर लगी मुहर: लाखो रूपये का अंधाधुंध भ्रष्टाचार, 02 पर गिरी गाज
- बैगा आदिवासी सम्मेलन मे हुए भ्रष्टाचार की पुष्टि, कांग्रेसी नेता प्रदीप सिंह ने की थी शिकायत
सिटी डेस्क
9425111809
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शहडोल बुलेटिन । देश के इतिहास में शायद ऐसा पहला मामला होगा जो मिठाई की कीमत अलग और मिठाई की खरीदी के साथ डिब्बों की खरीदी अलग से की गई हो और उसका भुगतान भी लाखों में किया गया हो और तो और उन डिब्बों को पैक करने के लिए रबड़ की खरीदी भी हजारों रुपए में की गई हो ऐसा माजरा दोनों खंड शिक्षा अधिकारियों की प्रस्तुत भुगतान बिलो मे साफ-साफ देखा जा सकता है। अधिकारियो ने भी ऑख मूंद भुगतान होने दिया। सम्मेलन में शेष व्यय के बिलो को जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा सत्यापन कराया गया है। इसमे पदस्थ कई कर्मचारियों, अधिकारियों की सांठ गांठ की बात भी सामने आई है।
जांच के बाद निलंबित 2 BEO ....
कमिश्नर शहडोल संभाग आर.बी. प्रजापति ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियत्रंण तथा अपील) नियम-1966 के नियम-9 के तहत प्रभारी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बुढ़ार जिला शहडोल अशोक कुमार शर्मा (मूलपद व्याख्याता) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग अनूपपुर नियत किया हैं। निलंबन अवधि में अशोक शर्मा को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।इसी मामले में संभागायुक्त ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत प्रभारी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी सोहागपुर जिला शहडोल शिवप्रताप सिंह चंदेल( मूलपद प्राचार्य हाईस्कूल सोहागपुर) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग उमरिया नियत किया हैं। निलंबन अवधि में श्री चंन्देल को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
शहडोल बुलेटिन की पड़ताल....
जिले के प्रशासनिक भ्रष्टाचार के इतिहास में दिनांक 30 मार्च 2018 को लालपुर हवाई अड्डे पर बैगा सम्मेलन सह विकास यात्रा का आयोजन को भुला नहीं जा सकता है। इस कार्यक्रम में जिले के दो खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा सहायक आयुक्त कार्यालय के शाखा प्रभारी एम.एस अंसारी के साथ लाखों का बंदरबांट कर रिश्तेदारो को लाभ पहुचाने का आरोप लगा था। बाजार की कीमत से अधिक का बिल बनवा कर सामग्री क्रय की गई तथा क्रय की गई सामग्री का ना तो टेंडर बुलवाया गया। और ना खुले बाजार से कोटेशन प्राप्त किया गया भ्रष्टाचार के आरोप में विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता की जांच के लिए शिकायत की गई इस शिकायत में सोहागपुर और बुढार ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी ने सभी सीमाओं को लांघते हुए भ्रष्टाचार की सभी सीमाओं को पार किया है। बुढार के खंड शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा द्वारा पतंजलि स्वदेशी बाजार शहडोल से 11,350 बोतल पानी की 14 की दर से खरीदी का बिल बनवाया गया जबकि आज तक बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी पानी की बोतल ना तो बनाती है और ना विक्रय करती है फिर भी सरकारी पैसे की लूट के लिए अपनी ही दुकान से खरीदी की गई।
रिश्तेदारों को पहुँचाया लाभ ....
इसके साथ ही इनके द्वारा अपने नजदीकी रिश्तेदार सत्यनारायण तिवारी एवं राजभान द्विवेदी से हजारों पैकेट लंच पैकेट का फर्जी बिल बनवा कर शासन को धोखा दिया गया। इस कार्य में भी टेंडर कोटेशन की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई इन दोनों के पास फर्जी बिल में जिला प्रशासन की संलिप्तता इसलिए भी प्रतीत होती है कि खंड शिक्षा अधिकारी बुढार एवं सोहागपुर के द्वारा व्यय की गई राशि का सत्यापन स्वयं किया गया है।
मिठाईयों के डिब्बे के हुए भुगतान.....
देश के इतिहास में शायद ऐसा पहला मामला होगा जो मिठाई की कीमत अलग और मिठाई की खरीदी के साथ डिब्बों की खरीदी अलग से की गई हो और उसका भुगतान भी लाखों में किया गया हो और तो और उन डिब्बों को पैक करने के लिए रबड़ की खरीदी भी हजारों रुपए में की गई हो ऐसा माजरा दोनों खंड शिक्षा अधिकारियों की प्रस्तुत भुगतान बिलो मे साफ-साफ देखा जा सकता है। अधिकारियो ने भी ऑख मूंद भुगतान होने दिया। सम्मेलन में शेष व्यय के बिलो को जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा सत्यापन कराया गया है। इसी तरह खंड शिक्षा अधिकारी सोहागपुर के द्वारा 6 क्विंटल बर्फी एवं 4 क्विंटल नमकीन का फर्जी बिल बिना टेंडर बिना कोटेशन के मनमानी दरों से दो लाख पचास हजार रुपए का बनवाया गया है। इसके साथ ही जो डिब्बा मिठाई का दुकानदार मुफ्त में देता है उसे पॉच रुपए पचास पैसे की दर से 21 हजार डिब्बो का भुगतान एक लाख पंद्रह हजार पाच सौ रुपए किया गया। इन डिब्बो की पैकिंग के लिए इन मातहतो ने खरीद डाले इसमें लगाए जाने वाले रबड़ भी 7500 में क्रय किया जाना बताया गया था। इसमें उल्लेखनीय रहा कि भोजन व्यवस्था में लेबर चार्ज के रूप में भी 80000 का बिल का भुगतान दिखाया गया था। जबकि पूरा भोजन कंचनपुर छात्रावास में बनवाया गया था इनके द्वारा स्वयं अपने द्वारा किए गए व्यय का सत्यापन किया गया। जांच का प्रमुख बिंदु यह भी है कि इन्हें लंच पैकेट बनवाने का आदेश किसने दिया जबकि खाद्य विभाग को यह जिम्मेदारी कलेक्टर महोदय द्वारा दी गई थी साथ ही व्यय किए गए बिलो का सत्यापन जब आपूर्ति अधिकारी को करना था तो इन दोनों से व्यय का सत्यापन क्यों कराया गया।
गौरतलब होकि मामले मे संभाग के आयुक्त से शिकायत के बाद उपायुक्त अनुसूचित जाति व जनजाति को जांच के आदेश दिए गए थें। जिसके बाद उपायुक्त अनुसूचित जाति व जनजाति ने दो सदस्यी कमेटी बनाकर मामले की जांच की जा रही थी। लगातार शहडोल बुलेटिन की टीम संभागायक्त के संज्ञान में हुई शिकायत को प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसे संभागायुक्त आर.बी. प्रजापति ने भी गंभीरता को समझते हुए जांच करवाई जिससे व्यापक स्तर पर हुए भ्रष्टाचार की पुष्टि के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।




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