आखिर कब अतिक्रमण मुक्त होगा बुढार नगर
नगर परिषद क्यों नहीं उठाती ठोस कदम, नोटिस तक सीमित कार्रवाई
विनय शुक्ला
बुढ़ार बुलेटिन। नगर परिषद के गठन उपरान्त शहर में विकास कार्य तो ठप पड़े ही हैं साथ ही भ्रष्टाचार की भी सुगबुगाहट की चर्चा हो रहीं हैं। चाहे वह निर्माण का ठेका गुपचुप तरीके से करीबियों को देने का मामला हो या फिर स्टेण्ड पर बस पार्किंग या सब्जी मंडी शुल्क वसूलने की ठेके के न होने का मामला हो। कुछ दिनों पूर्व शहर में चाय-पान, सब्जियों व फल के ठेला लगाने वाले गरीबों पर नगर पालिका बेरहम होती नजर आ रही है। भले ही चुनावी समर में गरीबों के हितार्थ काम करने का संकल्प का नगर की में भाजपा के द्वारा रट्टा मारा गया था, लेकिन अब जमीनी हकीकत काफी कड़वी होती नजर आ रही है।जबकि दो वर्ष बीतने जा रहे हैं। दरअसल पूर्व घोषित कार्य के अनुसार नगर परिषद ने पुलिस सहयोग से शहर को सुन्दर दिखाने के लिए अतिक्रमण हटाए जाने की कार्रवाई की बात कही जा रही थी। लेकिन वास्तविक अवैध अतिक्रमण और स्थाई अतिक्रमण किए लोगों पर मेहरबानी दिखाते हुए नगर पालिका की नजर गरीबों की गुमटियों, सब्जी की टोकरियों और चाय-पान के डिब्बों पर जमकर गरजीं और नोटिस देकर शांत बैठ गईं। वहीं स्थाई तरीके से सरकारी सम्पत्ति पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण किए लोगों का न तो चिह्नीकरण किया गया और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। हालांकि हाथी के दांत दिखाने भी थे।यहां लोग यही कहते नजर आ रहे थे कि गरीबों को षडय़ंत्र पूर्वक हटाया जा रहा है, जबकि स्थाई रूप से अतिक्रमण किए लोगों के खिलाफ कार्रवाई कभी नहीं की जाती है। मात्र 10 ₹20 का जुर्माना ही किया गया।
यात्रियों की परेशानी सबब....
देखा जाए तो स्टेशन जाने के लिए सिंधी बाजार, रेलवे मार्केट, कोतमा रोड से होकर जाना पड़ता है और वही सबसे ज्यादा भारी ट्राफिक जाम रहता है जिससे राह पर चलने वाले लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है यहां तक की रेलवे मार्केट से निकलते समय लगे हुए जाम के कारण यात्रियों को ट्रेन पकड़ने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है कई बार तो लोगों की ट्रेने तक छूट जाती है।इन मार्गो पर बड़ी दुकाने व सब्जी दुकान रास्ते में अतिक्रमण किए हुए बैठे रहते हैं जिससे गाड़ियों का निकलना बहुत ही मुश्किल होता है और कई बार कोतमा रोड और सब्जी मंडी में घंटों जाम लगा रहता है जिस कारण कई यात्रियों को ट्रेन पकड़ने में काफी दिक्कतें आती हैं लेकिन नगर परिषद लगभग 18 वर्ष से लगातार बनी इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। आखिर क्यों ? एक बडा सवाल।

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