कोल वाशरी, प्लांट अधिकारियों का काला खेल@भाग_1
हंगामा है बरपा, डाका भी मारा है, चोरी भी की है, ठप्प हुई 500 विद्युत ईकाई
#जेनको के ताप विद्युत गृहो मे कोल क्वालिटी की गुणवत्ता के निगहबान ही निकले बेईमान
स्टीम कोयले की हेराफेरी करने वालों की बदौलत हुई यूनिट बंद#
क्राइम डेस्क
9425111809
शहडोल बुलेटिन। मध्यप्रदेश के ताप बिजली घरों में जलने वाले कोयले की माइंस एंड में लोडिंग से लेकर पावर प्लांट में पहुंचने से लेकर फायर्ड होने तक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ जब मध्यप्रदेश प्रदेश के वर्तमान कैबिनेट मंत्री और तत्कालीन विधायक जीतू पटवारी द्वारा ऊर्जा विभाग से मांगी गई सिंगाजी ताप बिजली घर खंडवा में कोयला खदानों से उठने वाले कोयले, वाशरी में कोयला धुलने के बाद पावर प्लांट में पहुँचने तक की अप्रैल 2017 से 15 मई 2018 तक बतायी गयी जानकारी की समीक्षा करने पर बहुत बड़े रहस्य का खुलासा हो सका। इसी क्रम में बदस्तूर आवंटित उच्च क्वालिटी का कोयला अदला-बदली के खेल में निम्न क्वालिटी की सप्लाई मे जिम्मेदारो की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यहाँ बदस्तूर जारी है खेल....
संजय गांधी ताप बिजली घर बीरसिंहपुर की 500 मेगावाट की विद्युत ईकाई क्लिंकर जाम होने से रविवार रात 10.30 बजे से ठप्प पडी हुई है वो भी ऐसे समय में जब प्रदेश में रबी की फसल में खेतिहर मांग के कारण वर्तमान में 14 हजार मेगावाट की सर्वाधिक मांग आपूर्ति करना है ऐसे में यूनिट के ठप्प होने से बिजली की आपूर्ति पर भारी प्रभाव पड़ेगा वही किसानो को विद्युत आपूर्ति ना होने का भारी खामियाजा भुगतना पडेगा । विगत एक सप्ताह से बीरसिंहपुर की 1320 मेगावाट की पांच इकाइयों से 1250 मेगावाट तक का बिजली उत्पादन किया जा रहा था। जोकि जानबूझकर जोखिम महज श्रेष्ठ प्रबंधन दिखाया जा सके उठाया गया। क्योंकि विधानसभा की हाई पॉवर कमेटी, विधायकों की टीम 5 फरबरी को विजिट करने इसी प्लांट आ रही है ऐसे समय मे 500 मेगावाट के यूनिट के बन्द होने से अधिकारियों में हलचल मच गई है। और येन केन इस यूनिट को पुनः चालू करने का युद्धस्तरीय प्रयास आरम्भ हो गया है। कोयले में सिलिका मिट्टी आदि की मात्रा जब ज्यादा होती है और Ashhandlig सिस्टम की देखरेख करने वाली कम्पनी / ठेकेदार अधिकारियों की मिली स्वार्थ से लापरवाह हो जाते है दलाली के कारण ऐसी घटनाएं हो जाती है और यदि सही देखरेख की जाती तो ऐन मौके पर जब बिजली की मांग प्रदेश में सर्वाधिक है बिजलीघर में क्लिंकर जाम होने से यूनिट ठप्प होने की घटना सम्भवतः न होती। सारा खेल कोयले की गुणवत्ता और ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही का है।
वाशरी का संगठित भ्रष्टाचार....
ऊर्जा विभाग म पर शासन ने अपने पत्र दिनाँक 27 AUG 2018 संलग्न दस्तावेजों में अप्रैल 2017 से 15 मई 2018 तक के माइंस छोर में उठाये गए कोयले की GCV. ANEXIER में देखें 4510 से 4049 तक, प्लांट में रेल रैक से पहुंचे मार्च 2018 में 11 मार्च को भेज और 13 मार्च को पहुंची रेक में Washed कोल अधिकतम 5193 GCV रेक से प्राप्त हुआ जबकि औसत 4600 से 4700 तक GCV रेक से Washed कोयले की प्राप्त होने की REPORT CIMFAR सेंट्रल GOVT की संस्था जिसे MP जेनको ने कोल सैंपलिंग के लिए करोड़ों रुपये सालाना खर्च कर लगाया तथा प्लांट में AS FIRED GCV में हजारों का अंतर साफ साफ दिखलाई पड़ रहा है। जिसमें अधिकतम 3600 से 3800 GCV MP जेनको द्वारा AS FIRED बतलायी गयी तो अरबों रुपये मूल्य का लगभग 800 से 1000 GCV का सालाना कोयले खेल आखिर किसने खेला...?? और इसकी भरपायी बिजली उपभोक्ता से फ्यूल कॉस्ट के नाम पर बिजली की दरों को बढ़ा और जोड़कर वसूल गया।
इसलिए पिस रहा उपभोक्ता....
दूसरा सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सिंगाजी खण्डवा में स्थापित 600×2 एवम 660×2 = 2520 मेगावाट क्षमता की चार सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी की इकाइयां लगभग 2000 GCV की डिजाइन स्टेशन हीट रेट पर BHEL द्वारा बनायी गयी हैं यानी 4000 GCV के कोयले से दो यूनिट बिजली का उत्पादन होना चाहिए यानी प्लांट में प्राप्त हो रहे 4400 से 4800 GCV के 500 ग्राम प्रति यूनिट से कम कोयला ख़पत (खर्च) होना चाहिये परंतु सिंगाजी ताप बिजली घर खंडवा में 660 से 680 ग्राम कोयला प्रति यूनिट धड़ल्ले से खपाया जा रहा है जो 30 से 35 % वास्तविक डिजाइन की ख़पत से ज़्यादा है इसी तकनीकी कारणो की बदौलत सालाना अरबों रुपयों की वसूली उपभोक्ता से कोयला ज़्यादा ख़पत दिखलाकर उपभोक्ता से वसूल जा रहा है। हमारे शहडोल बुलेटिन ने ग्राउंड जीरो पर जाकर बिजली की बढती कीमत जनता क्यों भार चुकाती है का स्पष्ट तथ्यात्मक विश्लेष्ण है।
गौरतलब हो कि हर विद्युत ताप गृह ईकाई मे विद्युत उत्पादन के लिए कोयले की रेक (मालगाड़ी) में Washed कोल अधिकतम 5193 GCV रेक से प्राप्त हुआ जबकि औसत 4600 से 4700 तक GCV रेक से Washed कोयले की प्राप्त होने की REPORT CIMFAR सेंट्रल GOVT की संस्था जिसे MP जेनको ने कोल सैंपलिंग के लिए करोड़ों रुपये सालाना खर्च कर लगाया तथा प्लांट में AS FIRED GCV में हजारों का अंतर साफ साफ दिखलाई पड़ रहा है। जिसमें अधिकतम 3600 से 3800 GCV MP जेनको द्वारा AS FIRED बतलायी गयी तो अरबों रुपये मूल्य का लगभग 800 से 1000 GCV का सालाना कोयले खेल आखिर किसने खेला इस मामले में खुलासा संबधित विभाग मे पदस्थ अधिकारियों की बढती संपत्ति की जांच हो तो सच्चाई सामने आ जाएंगी और कोयला की मूल रूप से अदला-बदली का डीओ से डंपिंग यार्ड के बीच किया गया अंधाधुंध भ्रष्टाचार एक्सपोज हो सकता है हालांकि संबधित विभाग के जिम्मेदारो की संपत्ति की जांच एवं साथ ही मध्यप्रदेश विद्युत ईकाई के लगातार मैनटिनेंस पर करोड़ों रूपये फूंक रहे हैं जवाबदेही तय कर वसूली की प्रक्रिया की जा सकती है।
मामले में घंटों इंतजार के बाद भी संजय गांधी विद्युत ताप गृह बीरसिंहपुर के लगभग तमाम जिम्मेदार अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी कुछ भी ना कह पाने की इस स्थिति को भला हम क्या समझें।
इससे जुड़ी लगातार खबरों को शहडोल बुलेटिन की पैनी नज़र रखे हुए हैं आखिर कैसे बेरोकटोक संचालित कोयला खदानों से खनन और परिवहन मे अदला-बदली में करोड़ों रूपये की कन्नी काटी जाती हैं।
शहडोल का अपना निष्पक्ष 05 भाषी लोकल न्यूज़ बुलेटिन जल्द ही आपकी एचडी स्क्रीन पर कृपया खबरो शेयर कीजिए।
24×7 Media Helpline
9425358576
9575511705
9009908786
9479516786
9425111809
x


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें