- ShahdolBulletin

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

रविवार, 22 मार्च 2020




तो क्या ....एसईसीएल सोहागपुर की तानाशाही से कोरोना वायरस की चपेट आ जाएंगे मजदूर


@कोयलाकर्मियों पर ध्यान दें प्रशासन,  मास्क ना सेनेटाईजर समूहों में काम रहे लाचार मजदूर

  #मंदिरमस्जिद पर आदेश का पालन कौन कराएगा @ नहींजरूरी..?


सिटी डेस्क 
9575511705
शहडोल बुलेटिन। Covid -19 कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों नें देश के मुखिया को भी परेशानी में डाल दिया है, देश के विभिन्न राज्यों की सीमाओं पर प्रवेश पर पूरी तरह के प्रतिबंध लगा दिया गया है वहीं इन राज्यों के कई जिले भी लाॅकडाउन कर दिये गये हैं । 
लगातार लोगों को घरों पर रहनें के लिये कहा जा रहा है और कोरोना से बचाव के लिये विभिन्न सावधानियां बरतनें के एहतियात दिये जा रहे हैं।
जहां एक तरफ पूरा देश इस बढ़ रही श्रंखला को रोकनें के लिये कंधे से कंधे मिलाकर पूरी तैयारी किये बैठा है वहीं अभी भी कोल इंडिया के अधीन एसईसीएल की  कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहड़ोल संभाग में दर्जन भर से ज्यादा कोयला खदानों में हजारों मजदूर हैं जो कि स्थानीय स्तर से लेकर देश के विभिन्न राज्यों से आकर निवासरत है और कार्य कर रहें हैं, बावजूद इसके ना ही इनमें संक्रमण की रोकथाम के लिये कोई पुख्ता इंतजाम किये गये हैं और ना ही कोई ऐसी खास व्यवस्था की गई है जिससे इनमें संक्रमण ना हो इस पर ध्यान दिया जाये।

 
हजारों की तादाद में कोयलाकर्मी....

संभाग भर में दर्जन भर से ज्यादा कोयला खदानों में कार्यरत अधिकारियों / मजदूरों की संख्या की बात की जाये तो वह हजारों में है , इतना ही नहीं इनसे जुड़े हजारों परिवारों में यह संख्या लाखों में है, एक तरफ प्रशासन जहां हर घंटे हाथ धोनें , संक्रमित स्थानों से दूर रहनें के साथ ही समूह में रहनें से मनाही कर रहा है वहीं सूत्र बताते हैं कोयलाकर्मी इन सबसे परे लगातार बिना किसी समुचित सुरक्षा के लगातार काम रहे हैं।
नाम ना लिखनें की शर्त पर एक कोयलाकर्मी में बताया कि वह सैकड़ों की तादात में समूह में होते हैं खुली खदानों के साथ भूमिगत कोयला खदानों में भी वह समूह में काम कर रहे होते हैं, खुली खदानों में तो धूल आदि से बचनें के इंतजाम तो हो जाते हैं पर भूमिगत खदानों के अंदर संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है, खदानों के अंदर गंदगी का अंबार है और वह समूह में होते हैं लगातार पानी का रिसाव होता रहता है जिससे वह कई बार भीग भी जाते हैं उनके बीच कई ऐसे कोयलाकर्मी होते हैं जो लगातार खांस व छींक रहे होते हैं, सिर्फ सर के ऊपरी हिस्से को ढ़कनें वाला हेलमेट व बैटरी लाईट को छोड़ उनके पास कुछ नहीं होता है। हर घंटे तो हाथ धोना तो दूर शौच आदि भी वह इन्हीं खदानों के अंदर करते हैं।

ठेकेदारी बनाम कोरोना...

भूमिगत और खुली कोयला खदानों में कई ऐसे कार्य हैं जिनका काम कई निजी संस्थानों को ठेकेदारी प्रथा से प्राप्त है इन संस्थानों में सैकड़ो लोग कार्यरत हैं इन प्राइवेट संस्थाओं द्वारा अब तक अपनें मजदूरों को किसी भी तरह के संक्रमण सुरक्षा हेतु इंतजाम स्वरुप व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।
जिले के कई कोयला खदानों में वर्तमान में इन संस्थाओं के सैकड़ो लोग अभी भी काम कर रहे हैं , इन्हीं संस्थाओं में आनें वाली एक JMS नामक एक कंपनी में काम कर रहे कर्मचारी से हमारी बात हुई तो जानकारी लगी कि उन्हें ना कंपनी द्वारा मास्क दिया गया है और ना ही सेनेटाईजर बिना इसके वह समूह में काम भी कर रहे हैं। 

घनी आबादी में भी रहते हैं कर्मचारी...

इतना ही नहीं कोल इंडिया द्वारा इन कर्मचारियों के लिये निर्मित  आवासीय स्थल भी घनी आबादी में है और कॉलोनी में घनी आबादी में रहते हैं , जहां एक तरफ सरकार लगातार इस महामारी से निपटनें के लिये हर संभव प्रयास कर रही है वहीं कोल इंडिया के द्वारा लगातार इसकी अनदेखी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।

मंदिरों, मस्जिदों में भी ध्यान दे प्रशासन...

प्रशासन लगातार आमजन की सुरक्षा के ऐहितियातन धार्मिक स्थलों पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, लगातार जिस तरह से कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के आंकड़ो में ईजाफा हो रहा है इससे यह बड़ी आपदा की दस्तक है इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता, इसे रोकनें के लिये इन परिस्थितियों में प्रशासन के साथ ही यह हर आम के लिये स्वयं की भी महत्वपूर्ण जवाबदारी है, जानकारी के मुताबिक अभी भी कुछ मस्जिदों में मुस्लिम भाई नमाज अदा करनें के लिये समूह में एकत्र होते हैं इन परिस्थितियों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है इसके लिये धार्मिक गुरुओं के साथ समाजसेवियों को भी आगे आना होगा और इस पर रोक लगाकर यह अपील करनी होगी कि वह अपने घर पर रहकर ही पूजा, अर्चना व नमाज अदा करें।


शहडोल बुलेटिन की टीम की ओर से आप सभी पाठकों को स्वस्थ के प्रति जागरूक रहकर जिला प्रशासन के लॉकडाऊन मे सहयोगी बने सलाह दी जाती है। घर मे रहकर कोरोना वायरस की संक्रमित चैन को नष्ट करने का प्रयास कर रही सरकार की मंशा पर पानी ना फेरे।। स्वास्थ्य रहे मस्त रहें।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad