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@अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस@

 मिशाल बनीं आटो वाली रानी

नारी शक्ति की मिशाल@परिवार का भरण-पोषण के साथ बीमार पति की बनी ताकत


जुगल मिश्रा 
9425136019
शहडोल बुलेटिन। आज अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस है और हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे महिला कि कहानी जिसनें गरीबी, बीमारी से लड़ते हुये आस-पास के ईलाके में प्रेरणा बन चुकी है। शहड़ोल जिले के अरझुला नामक गांव की रहनें वाली रानी वर्मन नामक महिला जो कि तंग हालात से लडने पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए ऑटो चलाकर अपनें और अपनें परिवार का ना सिर्फ पेट पाल रही है। बल्कि अपनें छोटे - छोटे बच्चों के साथ ही बीमार पति का ईलाज भी करा रही है। इतना ही नहीं रानी नें बिना कोई परवाह किये कड़ी मेहनत कर आज समाज के लिये मिसाल बन चुकी है।

कोयलांचल नगरी अर्झुला निवासी रानी बर्मन फर्राटेदार आटो चलाना रोज सैकड़ो सावरियों से आमना सामना करना यह उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है कुछ ही समय पहले वक्त की मार नें रानी नें को यह सब करना सिखा दिया अचानक पति को कैन्सर होने का पता रानी को चला जिसकी वजह से रानी के सामनें आपने तीन छोटे बच्चों और पति का ईलाज कराना किसी बडी चुनौती से कम नहीं था। पर रानी नें वक्त के हालत को समझा और जिम्मेदारियों को पूरा करनें बीड़ा अपने कंधो पर उठा लिया।

अरझुला गांव की रहनें वाली रानी बर्मन के परिवार में कमाने वाला सिर्फ उसका पति था जो अब कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से जूझ रहा है घर चलानें से लेकर परिवार के तीन छोटे बच्चों को पढ़ानें लिखानें और बीमार पति का ईलाज की जिम्मेदारी अब रानी के कंधों पर थी रानी  ने घर कि परिस्थितियो को देखते हुए स्वयं कुछ करने का सोचा और कर्ज लेकर एक आटो खरीदा जिसे चलाना सीखकर ग्रामीण ईलाकों से बुढार नगर के बीच चलाना शुरू कर दिया। शुरु में कुछ तकलीफे भी हुई और कई तरह कि अनदेखी करनें के बाद रानी इस सड़क पर आटो चलानें वाली एकलौती महिला है जो उन महिलाओं के लिए भी एक  मिसाल है जो परिस्थितियो से  लड़कर कुछ कर गुजरना चाहती है। शहडोल बुलेटिन रानी और रानी जैसी बहादुर नारी शक्ति को सैल्यूट करती हैं।
इसके साथ साथ शहडोल के जिला प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों से ऐसी प्रतिभा को निखारने और दूसरी महिलाओं को प्रेरणा मिले समाज में इन ऐसी विभूतियों को सम्मानित किया जाना चाहिए।